भारत
इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का परमाणु जखीरा भी तेजी से आधुनिक हो रहा है और जनवरी 2026 तक भारत के पास 190 परमाणु हथियार हो चुके हैं.
वैश्विक स्तर पर हथियारों और सैन्य ताकत पर नजर रखने वाली मशहूर संस्था सिपरी (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. स्वीडन के थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की इस सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है. भारत ने अपनी सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए $92.1 बिलियन (करीब 7.6 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम बजट खर्च किया है.
यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 8.9 प्रतिशत ज्यादा है. ग्लोबल रैंकिंग की बात करें तो पहले नंबर पर अमेरिका ($954 बिलियन) है, जिसके बाद क्रमशः चीन, रूस और जर्मनी का नंबर आता है. खास बात यह है कि पूरी दुनिया में सैन्य खर्च का बजट रिकॉर्ड $2.9 ट्रिलियन तक पहुंच गया है, जो दुनिया की कुल जीडीपी का 2.5 फीसदी है. वहीं, पाकिस्तान का सैन्य खर्च $11.9 बिलियन रहा.
इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी बात परमाणु हथियारों से जुड़ी है. जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत के पास अब लगभग 190 परमाणु हथियार हो चुके हैं, जो पाकिस्तान के 170 के मुकाबले काफी ज्यादा हैं. रिपोर्ट बताती है कि भारत लगातार अपने परमाणु जखीरे को आधुनिक बना रहा है.
अब भारत का मुख्य फोकस ऐसी लंबी दूरी की मिसाइलें और डिलीवरी सिस्टम तैयार करने पर है, जो चीन के किसी भी कोने में मौजूद टारगेट को आसानी से तबाह कर सकें. हालांकि, पाकिस्तान के साथ पुरानी प्रतिद्वंद्विता को लेकर भी भारत की रणनीतिक तैयारियां पूरी हैं. दूसरी तरफ, पाकिस्तान भी अगले दशक में अपने परमाणु हथियारों को बढ़ाने के लिए तेजी से काम कर रहा है.
सिपरी की रिपोर्ट ने पिछले साल मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच भड़की सैन्य तनातनी का भी जिक्र किया है. रिपोर्ट के अनुसार, 7 से 10 मई 2025 के दौरान दोनों देशों के बीच सीमा पर भीषण गोलीबारी और मिसाइल अटैक हुए थे. भारत ने पाकिस्तान के उन एयर और मिसाइल बेसों को निशाना बनाया था, जिनका इस्तेमाल परमाणु हमलों के लिए हो सकता था.
हैरानी की बात यह है कि इस टकराव में इतिहास में पहली बार भारत और पाकिस्तान ने पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ साइबर वॉरफेयर का भी जमकर इस्तेमाल किया. हालांकि, दोनों ही देशों ने समझदारी दिखाते हुए इस संकट को महायुद्ध में बदलने से रोक लिया.
दुनियाभर में हथियारों के आयात के मामले में जो पांच देश सबसे आगे रहे, उनमें यूक्रेन के साथ भारत, सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान शामिल हैं. इन पांच देशों ने मिलकर पूरी दुनिया के 35 फीसदी हथियार खरीदे हैं. सिपरी ने चिंता जताते हुए कहा है कि आज पूरी दुनिया में शांति वार्ताओं का दौर खत्म हो रहा है और महाशक्तियां कूटनीति के बजाय सैन्य ताकत के दम पर फैसले कर रही हैं.
गाजा और यूक्रेन युद्ध की वजह से दुनिया के शीर्ष 15 देश अपने बजट का 80 फीसदी हिस्सा सिर्फ सेनाओं पर फूंक रहे हैं. इस माहौल के बीच भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तेजी से एक बड़ी मिलिट्री और न्यूक्लियर महाशक्ति के रूप में उभर रहा है.