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भारत ने लेह में सिंधु नदी पर पहला 'रॉक चेक डैम' बनाया, 40 मिलियन लीटर पानी जमा होगा, पाकिस्तान को कितना बड़ा झटका?

लद्दाख जैसे ठंडे रेगिस्तान में गर्मियों के दौरान नदी का बहाव तेज होता है लेकिन पानी का स्तर बेहद कम. यह रॉक डैम पानी के बहाव को धीमा करके अपस्ट्रीम में लगभग 4 करोड़ लीटर पानी का भंडारण बनाता है.

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भारत ने लेह में सिंधु नदी पर पहला 'रॉक चेक डैम' बनाया,  40 मिलियन लीटर पानी जमा होगा, पाकिस्तान को कितना बड़ा झटका?

रॉक डैम की अनुमानित लागत लगभग 10 लाख रुपये आई. (फोटो- @lg_ladakh/X)

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सिंधु जल संधि को स्थगित करने के बाद भारत ने सिंधु नदी के पानी के इस्तेमाल लेह और लद्दाख के किसानों की भलाई के लिए करना शुरू कर दिया है. भारत ने लेह के उपशी में सिंधु नदी पर पहला 'रॉक चेक डैम' बनाकर तैयार कर दिया है. खास बात ये है कि इस 'रॉक चेक डैम' को बनाने के लिए किसी भी तरह के सीमेंट या सरिये का प्रयोग नहीं किया गया है. ये बांध पूरी पूरी तरह से प्राकृतिक पत्थरों से बना है. इस डैम के बनने से लेह के दर्जनों गांवों में सिंचाई के लिए पानी आसानी से उपलब्ध होगा. 

दशकों की मुश्किल झेलने के बाद लेह के किसानों को राहत मिली

पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के लागू रहने के कारण लेह और लद्दाख के किसान सबसे ज्यादा नुकसान उठाते थे. लेकिन अब उपशी में 'रॉक चेक डैम' बन जाने से नदी में  पानी का स्तर लगभग 10 फीट बढ़ गया है. इस पानी को पंप के माध्यम से 'इगू फे' सिंचाई नहर तक पहुंचाना आसान हो गया है. प्राकृतिक पत्थरों से बना ये बांध 40 मिलियन लीटर पानी जमा करने की क्षमता रखता है. 

लेह जिले में उपशी के पास लगभग 11,400 फीट की ऊंचाई पर सिंधु नदी पर बनाया गया ये बांध लद्दाख प्रशासन के 'सिंधु जल समृद्धि अभियान' के तहत तैयार किया गया है. पूरी तरह से इको-फ्रेंडली इस बांध को बनाने में सीमेंट या कंक्रीट का उपयोग बिल्कुल नहीं किया गया है. इसे नदी के तल और आसपास से एकत्र किए गए लगभग 180 मीट्रिक टन प्राकृतिक भारी पत्थरों को आपस में जोड़कर बनाया गया है.

यह ढांचा महज 7 दिनों में बनकर तैयार हुआ और इसकी अनुमानित लागत लगभग 10 लाख रुपये आई. इस बांध की लंबाई 200 फीट है, जिसका आधार 30 फीट चौड़ा और ऊपरी हिस्सा 15 फीट चौड़ा है. ऊंचाई 5 फीट है. इससे पहले लेह के किसानों को गर्मी और बसंत में बुवाई के समय पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ता था. सिंधु जल संधि के कारण  पानी के इस्तेमाल पर पाबंदी थी और प्रशासन चाह कर भी कुछ नहींकर पाता था. पानी की किल्लत ने किसानों की आर्थिक हालत भी खराब कर दी थी. 

पाकिस्तान को क्या संदेश?

दशकों तक पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि के प्रावधानों का गलत फायदा उठाया. इस संधि के लागू रहते पाकिस्तान छोटी-मोटी सिंचाई परियोजनाओं पर भी आपत्ति कर देता था जिससे प्रोजेक्ट रुक जाते थे. अब भारत ने सीधा संदेश दे दिया है कि नदियों का पानी पहले उसके नागरिकों के हित के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. 

लेह के उपशी में सिंधु नदी पर बना पहला 'रॉक चेक डैम' अपनी तरह का इकलौता प्रोजेक्ट नहीं है. लद्दाख प्रशासन अब सिंधु नदी पर ऐसे और भी चेक डैम बनाने पर काम कर रहा है. हाल ही में लद्दाख प्रशासन ने ग्लेशियर से निकलकर सिंधु नदी में बह जाने वाला करीब 9 करोड़ लीटर पानी को भी नहरों के जरिए किसानों के खेत तक पहुंचाया है. इससे लद्दाख में 1500 एकड़ से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई हो रही है. 

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