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इंडियन एयरफोर्स के विंग कमांडर के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट, 1923 के तहत केस दर्ज किया गया है. 31 मई को गिरफ्तारी के बाद खुफिया एजेंसियों ने पूछताछ की, जिसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया. फिलहाल वो तिहाड़ जेल में बंद है.
भारतीय वायुसेना का एक अफसर को पाकिस्तान की खुफिया एजेंट ने सोशल मीडिया पर कॉन्टैक्ट के बाद हनी-ट्रैप में फंसा लिया. उसने अफसर से सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील डेटा और सीक्रेट डॉक्यूमेंट्स भी शेयर करा लिए. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 44 साल के विंग कमांडर को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन सवाल ये है कि आरोपी विंग कमांडर को किस कानून के तहत और कितनी सजा मिलेगी?
दिल्ली पुलिस ने शनिवार को इस मामले के बारे में जानकारी दी. हालांकि अधिकारी का नाम नहीं बताया गया है. आरोपी को 31 मई को हिरासत में लिया गया था और उसके करीब 50 दिनों बाद उसके बारे में डिटेल शेयर की है. दिल्ली पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि इस मामले में इन्वेस्टिगेशन टीम ने 30 जुलाई को अदालत में चार्जशीट दायर की है.
इंडियन एयरफोर्स के विंग कमांडर के खिलाफ विशेष प्रकोष्ठ पुलिस थाने में ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट, 1923 यानी OSA के तहत केस दर्ज किया गया है. 31 मई को गिरफ्तारी के बाद विशेष प्रकोष्ठ और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों द्वारा संयुक्त पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्हें शहर की अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें जून में न्यायिक हिरासत में भेज दिया. अधिकारियों ने बताया कि वह वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद हैं.
IAF के प्रवक्ता ने बताया कि वह कड़ी निगरानी में था और उसे संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंप दिया गया. उन्होंने बताया कि विंग कमांडर, जो कथित तौर पर अपने निजी जीवन में समस्याओं का सामना कर रहे थे, इस साल की शुरुआत में उनकी एक महिला से सोशल मीडिया पर दोस्ती हो गई. उन्होंने किसी सिक्योर्ड ऐप से मैसेज और फिर कॉल पर बात की.
अधिकारी ने कहा, 'उस महिला ने विंग कमांडर का भरोसा जीतने के बाद उसे तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से भारतीय रक्षा प्रणाली से संबंधित गोपनीय दस्तावेज और संवेदनशील विवरण साझा करने के लिए बहकाया. उसने उससे अपने सहकर्मी के मोबाइल फोन पर एक ऐप इंस्टॉल करने के लिए भी कहा, जो संभवतः स्पाईवेयर या रिमोट एक्सेस मैलवेयर के रूप में काम करता था, जिसका उपयोग फोन का डेटा चुराने और उसकी लोकेशन ट्रैक करने के लिए किया जाता था.'
ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट की धारा 3, जासूसी से जुड़ी हुई है. अगर जांच में ये साबित होता है कि अधिकारी ने ऐसी गोपनीय जानकारी साझा की है, जो भारत की सुरक्षा या हितों को नुकसान पहुंचा सकती है तो धारा 3 लागू हो सकती है. रक्षा, सैन्य या वायुसेना से संबंधित मामलों में अधिकतम 14 साल तक की जेल का प्रावधान है. अगर आरोप ये साबित होता है कि अधिकारी ने अपने पास मौजूद गोपनीय सरकारी/रक्षा जानकारी किसी विदेशी एजेंट को दी है तो धारा 5 भी लग सकती है. इस धारा में अधिकतम सजा तीन साल तक हो सकती है.
हालांकि ये बात भी महत्वपूर्ण है कि सिर्फ हनी ट्रैप में फंसना अपने-आप में अपराध नहीं है. सजा इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच और ट्रायल में उन्होंने वास्तव में कौन-सी जानकारी साझा की, किसे साझा की और उसका सुरक्षा पर क्या असर हुआ आरोप साबित होने तक विंग कमांडर को दोषी नहीं माना जा सकता.
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