भारत
12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए दुखद एयर इंडिया विमान हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का निधन हो गया. 61 वर्षीय रूपाणी लंदन की यात्रा पर जा रहे थे, जब ये हादसा हुआ. उनके असमय निधन से राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है.
12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 के हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया . ये विमान अहमदाबाद से लंदन जा रहा था, लेकिन टेकऑफ के कुछ ही मिनटों बाद मेघानीनगर क्षेत्र में बीजे मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स हॉस्टल पर गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया . इस भीषण हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का निधन हो गया . वे 61 वर्ष के थे और निजी यात्रा पर लंदन जा रहे थे . रूपाणी के निधन की खबर से न सिर्फ गुजरात, बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है .
करोड़ों की संपत्ति छोड़ गए विजय रूपाणी
पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी अपने पीछे करीब 9.21 करोड़ रुपये की संपत्ति छोड़ गए हैं . ये जानकारी उनके द्वारा 2022 में दाखिल चुनावी हलफनामों के आधार पर सामने आई है. रूपाणी की कुल चल संपत्ति लगभग 5.43 करोड़ रुपये थी . इसमें शामिल हैं, नकद राशि ₹2,10,233, बैंक डिपॉजिट, ₹74,93,158 शेयर और म्यूचुअल फंड ₹3,00,96,412, बीमा पॉलिसी ₹16,56,122, सोना/आभूषण ₹17,94,672, वाहन मूल्य ₹17,85,480,
अचल संपत्ति का ब्योरा
उनकी अचल संपत्ति की कुल अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ रुपये थी . प्रमुख संपत्तियां इस प्रकार हैं.
राजकोट की गैर-कृषि भूमि: ₹1.41 करोड़
आवासीय संपत्ति: ₹2.03 करोड़
वाणिज्यिक संपत्ति: ₹21 लाख
पत्नी अंजलीबेन की संपत्ति
विजय रूपाणी की पत्नी अंजलीबेन रूपाणी के पास भी चुनावी हलफनामे के अनुसार करीब 1.5 करोड़ रुपये की संपत्ति थी . इसमें चल संपत्ति: ₹50 लाख की है और अचल संपत्ति 1 करोड़ की. ये संपत्तियां अहमदाबाद और राजकोट जैसे शहरों में स्थित थीं .
कितनी थी देनदारी?
विजय रूपाणी पर करीब 83 लाख रुपये का कर्ज भी था . ये कर्ज उन्होंने अपने करीबी परिजनों और सहयोगियों से लिया था, जिसमें उनकी पत्नी अंजलीबेन और बिपिनभाई जैसे लोग शामिल हैं .
एक शांत और योजनाबद्ध नेता
2016 से 2021 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे विजय रूपाणी को भाजपा के एक वरिष्ठ और भरोसेमंद नेता के रूप में जाना जाता था . उन्होंने राजकोट से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और पार्टी संगठन से लेकर राज्य शासन तक में अहम भूमिका निभाई . उनका नेतृत्व विनम्रता, सादगी और योजनाबद्ध सोच के लिए जाना जाता था . उनका असमय जाना गुजरात की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है .
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