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हिमाचल प्रदेश में IAS, IPS और IFS के कितने पद, सुक्खू सरकार क्यों कम करना चाहती है संख्या? कहीं ये तो नहीं सबसे बड़ी वजह

Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में स्वीकृत आईएएस, आईएफएस और आईपीएस पदों की संख्या को कम करने की योजना बनाई है. इस संबंध में राज्य सरकार ने केंद्रीय कार्मिक विभाग को पत्र भेजा है. आइए जानते हैं कि इसके पीछे सरकार का क्या उद्देश्य है.

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हिमाचल प्रदेश में IAS, IPS और IFS के कितने पद, सुक्खू सरकार क्यों कम करना चाहती है संख्या? कहीं ये तो नहीं सबसे बड़ी वजह

हिमाचल प्रदेश सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू (इमेज क्रेडिट - X)

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  • हिमाचल सरकार राज्य में अधिकारियों की संख्या कम करेगी. 
  • IAS, IPS और IFS अधिकारियों के स्वीकृत पद कम किए जाएंगे. 
  • राज्य सरकार ने केंद्रीय कार्मिक विभाग को इस संबंध में पत्र लिखा है 
  • सरकार का दावा है कि इससे करीब 2000 करोड़ रुपये की बचत होगी 

Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश सरकार अपने प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है. राज्य सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय वन सेवा (IFS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के कैडर में स्वीकृत पदों की संख्या को कम करने का फैसला किया है. सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को प्रस्तावित बदलावों की जानकारी दी. राज्य सरकार ने इस संबंध में केंद्रीय कार्मिक विभाग को पत्र भेजा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि मौजूदा समय में राज्य में कितने IAS, IPS और IFS अधिकारी के स्वीकृत पद हैं और सरकार इसे क्यों कम करना चाहती है. 

क्यों अधिकारियों की संख्या कम करना चाहती है सरकार?

सीएम सुक्खू ने बताया कि सरकार का मकसद अधिकारियों का बेहतर इस्तेमाल करना और प्रशासनिक खर्च में कमी लाना है. सीएम के अनुसार प्रस्तावित प्रशासनिक पुनर्गठन से राज्य सरकार के खर्च में करीब 2000 करोड़ रुपये की कमी आने की उम्मीद है. सरकार का कहना है कि स्वीकृत पदों को वास्तविक जरूरत के अनुरूप करने से अनावश्यक खर्च को कम किया जा सकेगा और बचे पैसे का उपयोग राज्य के विकास में किया जाएगा. 

कितनी है IAS, IPS और IFS पदों की संख्या? 

सीएम के अनुसार राज्य में IAS के स्वीकृत पदों की संख्या 153 है, जिसे घटाकर 130 करने का प्रस्ताव है और IFS के स्वीकृत पदों की संख्याय 118 है, जिसे कम कर 83 किया जाएगा. वहीं आईपीएस के करीब 96 पदों के भी कम किया जाएगा. वहीं सीएम ने कहा कि केंद्रीय प्रतिनियुक्त पर जाने पर आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों को तुरंत रिलीव किया जाएगा.

ऐसे अधिकारियों का इस्तेमाल करेगी सरकार 

सीएम सुखविंदर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल अधिकारियों के पद बनाए रखना नहीं है, बल्कि उपलब्ध मानव संसाधन का इस्तेमाल उन क्षेत्रों में करना है, जहां उनकी वास्तविक जरूरत है. उन्होंने कहा कि सरकार को योजनाओं को जमीन पर लागू करने, प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और आम लोगों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने के लिए अधिकारियों की आवश्यकता है.

सरकार का मानना है कि कई ऐसे पद हैं, जहां अधिकारियों की क्षमता का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. ऐसे में कैडर के पुनर्गठन से अधिकारियों को उन विभागों और क्षेत्रों में तैनात किया जा सकेगा, जहां काम का दबाव अधिक है. सीएम के अनुसार यह कदम सरकार की फिजूलखर्ची कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है. सरकार सीमित संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करना चाहती है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था पर होने वाले खर्च का सीधा फायदा आम जनता तक पहुंचाया जा सके.

किसके कितने पद होंगे कम?

प्रस्तावित आंकड़ों के मुताबिक, IAS कैडर में 23 पदों की कमी की जाएगी. वर्तमान में राज्य में 153 स्वीकृत IAS पद हैं, जिन्हें घटाकर 130 करने का प्रस्ताव है. वहीं IFS कैडर में 35 पद कम किए जाएंगे. IFS के स्वीकृत पदों की संख्या 118 से घटाकर 83 करने की योजना है. IPS कैडर के मामले में भी सरकार पदों की संख्या कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

सरकार करेगी ये समीक्षा

सरकार के इस फैसले का एक प्रमुख उद्देश्य ऐसे पदों की समीक्षा करना है, जहां काम का पर्याप्त दबाव नहीं है. सरकार चाहती है कि अधिकारियों को उनकी जरूरत और कार्यभार के हिसाब से अलग-अलग विभागों और क्षेत्रों में लगाया जाए. इससे प्रशासनिक अधिकारियों का बेहतर उपयोग  किया जा सकेगा. 

मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि प्रशासनिक ढांचे को जरूरत के हिसाब से छोटा और प्रभावी बनाने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। इसका मकसद केवल खर्च घटाना नहीं, बल्कि सरकारी कामकाज को ज्यादा परिणामदायी बनाना भी है.

प्रदेश सरकार के इस प्रस्ताव को प्रशासनिक ढांचे के पुनर्गठन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं तो IAS, IFS और IPS कैडर के स्वीकृत पदों की संख्या में कमी के साथ राज्य के प्रशासनिक खर्च में भी उल्लेखनीय बचत हो सकती है. सरकार का दावा है कि बचने वाले संसाधनों का इस्तेमाल विकास कार्यों और जनता से जुड़ी योजनाओं को मजबूत करने में किया जा सकेगा.

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