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Gyanesh Kumar होंगे देश के अगले मुख्य चुनाव आयुक्त, PM मोदी की अगुवाई वाली मीटिंग में हुआ फैसला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई बैठक में अगले मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर ज्ञानेश कुमार के नाम पर मुहर लगी है. अगले सीईसी के तौर पर नियुक्ति के लिए कानून मंत्रालय ने ज्ञानेश कुमार के नाम से अधिसूचना जारी कर दी है.

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Gyanesh Kumar होंगे देश के अगले मुख्य चुनाव आयुक्त, PM मोदी की अगुवाई वाली मीटिंग में हुआ फैसला
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Next CEC Of India: कानून मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा की कि ज्ञानेश कुमार को नया मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है. वह राजीव कुमार की जगह लेंगे, जो 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद मंगलवार (18 फरवरी) को पद से सेवानिवृत्त हो जाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई बैठक में अगले मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर ज्ञानेश कुमार के नाम पर मुहर लगी है. ज्ञानेश कुमार अभी तक चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. अब उनके नाम पर मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने वाली समिति ने मुहर लगा दी है. वहीं, डॉ. विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त के पद पर चुना गया है. 

कितने साल का होता है सीईसी का कार्यकाल
मुख्य चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है, जो भी पहले हो. कुमार चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर नए कानून के तहत नियुक्त होने वाले पहले सीईसी बन गए हैं. ज्ञानेश कुमार का नाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने चुना. समिति की आज शाम साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठक हुई. इसने सिलेक्शन समिति द्वारा चुने गए उम्मीदवारों में से नाम की सिफारिश की.
 
क्या था कांग्रेस का पक्ष
आज सुबह कांग्रेस ने सुझाव दिया कि सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन के लिए बैठक को तब तक के लिए स्थगित कर दे जब तक कि 19 फरवरी को चयन समिति के गठन पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई नहीं हो जाती. बैठक के तुरंत बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाकर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 'वह चुनाव आयोग पर नियंत्रण चाहती है, न कि उसकी विश्वसनीयता को बनाए रखना चाहती है.' सिंघवी ने कहा, 'हमारा सुझाव है कि केंद्र सरकार सुनवाई के बाद तक इस बैठक को स्थगित कर दे और अपने वकीलों को उपस्थित होकर अदालत की सहायता करने का निर्देश दे, ताकि सुनवाई प्रभावी हो सके. तभी कोई निर्णय गंभीरता से लिया जा सकता है.'


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उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, पद की शर्तें, कार्यकाल), अधिनियम 2023 चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए 'पक्षपातपूर्ण तंत्र' बनाता है. उन्होंने कहा, 'शुरुआत में, हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि यह समिति 2 मार्च, 2023 के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्पष्ट और सीधा उल्लंघन कर रही है, जिसमें अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने घोषणा की थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश वाली समिति द्वारा की जानी चाहिए.'

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