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नरेश पटेल एक पाटीदार नेता हैं, वे लेउवा समुदाय से आते हैं. उन्हें लुभाने की कोशिश कई राजनीतिक पार्टियां कर चुकी हैं. पढ़ें कुमार साहिल की रिपोर्ट.
डीएनए हिंदी: गुजरात (Gujarat) में चुनाव की तारीखों के ऐलान में बस औपचारिकता भर बाकी है. तमाम राजनीतिक दल और दिग्गज नेताओं का जमावड़ा गुजरात में देखने को मिल रहा है. चाहे बात बीजेपी की गौरव यात्रा की हो या फिर अरविंद केजरीवाल का मिशन गुजरात.
कांग्रेस को समीक्षक चूका हुआ बता रहे हैं लेकिन गुजरात में दबे पांव इस बात का जिक्र हो रहा है कि तो कांग्रेस भी नंबर की होड़ में है. तमाम वादे और दावे के बीच एक शख्स गुजरात के राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ. कहा जा रहा है कि बगैर उसके रजामंदी के बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सौराष्ट्र में रणनीति की घोषणा करने से बच रही है.
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कहा जाता है कि वे एक सामाजिक शख्सियत हैं लेकिन उनकी पकड़ राजनीति के मैदान में कुछ कम नहीं है. खोडलधाम ट्रस्ट के चेयरमैन हैं और एक नामी उद्योगपति भी हैं. ये शख्स नरेश पटेल हैं.
नरेश पटेल कौन हैं?
नरेश पटेल एक पाटीदार नेता हैं, वे लेउवा समुदाय से आते हैं. वे खोडलधाम ट्रस्ट के चेयरमैन भी हैं. सौराष्ट्र क्षेत्र में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है. वे सामाजिक कार्यों में आगे रहते हैं और समुदाय के बीच लोकप्रिय भी हैं. नरेश पटेल आर्थिक तौर पर कमजोर बेटियों की शादी से लेकर मेधावी बच्चों की पढ़ाई में खर्चे को भी वहन करते हैं.
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खोडलधाम ट्रस्ट लेउवा पटेलों का सामाजिक केंद्र होने के साथ-साथ राजनीतिक केंद्र भी माना जाता है. नरेश पटेल इससे इनकार करते रहे हैं और यही वजह है कि पीएम मोदी से लेकर अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के आलाकमान तक उनकी गणेश परिक्रमा करते दिख रहे हैं. नरेश पटेल किसी भी पार्टी में जाने की संभावनाओं से इनकार करते रहे हैं.
गुजरात चुनाव में नरेश पटेल की अहमियत
नाम न बताने की शर्त पर पटेल समुदाय में पकड़ रखने वाले नेता कहते हैं कि नरेश पटेल का सम्मान गुजरात में और खास तौर पर सौराष्ट्र में दलगत सियासत से ऊपर है. वे कहते हैं कि नरेश पटेल का एक बेटा पिछली बार कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार में शामिल हुआ था.
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इस बार कांग्रेस की स्थिति को देखते हुए नरेश पटेल कांग्रेस की तरफ नहीं देख रहे हैं, लेकिन नरेश पटेल और बीजेपी के दिग्गज नेताओं से उनकी नजदीकी के किस्से जगजाहिर हैं.
क्यों इतना अहम है नरेश पटेल का कद?
नरेश पटेल चुनावी समर में इसलिए भी जरूरी हो जाते हैं कि वे उसी समुदाय से आते हैं जिससे हार्दिक पटेल आते हैं. हार्दिक से इतर उनकी छवि उदार और सामाजिक शख्सियत की है. ऐसे में 11 जिलों में उनका प्रभाव और भी उन्हें खास बनाता है. लेकिन ऐसे में ये सवाल उठता है कि क्या नरेश पटेल गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल से ज्यादा जमीनी नेता हैं जिसके लिए बीजेपी बेचैन दिख रही है.
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11 जिलों में गेमचेंजर साबित हो सकते हैं नरेश पटेल
भूपेंद्र पटेल पाटीदार समुदाय के कड़वा उपजाति से ताल्लुक रखते हैं और वे मूल रूप से उत्तरी गुजरात से आते हैं जबकि मध्य गुजरात और सौराष्ट्र का कनेक्शन नरेश पटेल को खास बनाता है. कहा जाता है कि सौराष्ट्र के करीब 11 जिलों में वे गेमचेंजर साबित हो सकते हैं जिसके लिए आम आदमी पार्टी और बीजेपी दोनों कोशिश कर रही है.
खोडलधाम समाज के साथ आस्था और श्रद्धा का सेंटर प्वाइंट भी है ऐसे में नरेश पटेल की मौन सहमति किसी भी पार्टी के लिए वरदान साबित हो सकती है. खोडलधाम ट्रस्ट 2017 में अस्तित्व में आया था.
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