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Ola-Uber को चुनौती देने आ रहा सरकार का 'सहकार', जानिए इसके बारे में सब कुछ

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि सरकार नई कॉपरेटिव टैक्सी सर्विस 'सहकार' लेकर आ रही है. सरकार की इस पहले से ओला-उबर जैसी कंपनियों को चुनौती मिल सकती है.

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Ola-Uber को चुनौती देने आ रहा सरकार का 'सहकार', जानिए इसके बारे में सब कुछ
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Amit Shah 'Sahakar' taxi service: केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि सरकार नई कॉपरेटिव टैक्सी सर्विस 'सहकार' लेकर आ रही है. गृह मंत्री ने बताया कि इस सेवा से होने वाला लाभ किसी बड़े उद्योगपति को नहीं बल्कि वाहन चालकों को मिलेगा. केंद्र सरकार ने ओला, उबर जैसी कंपनियों को टक्कर देने के लिए इस सेवा को शुरू किया है. यह सेवा बाइक, कैब और ऑटो जैसी सुविधाएं देगी.

अमित शाह ने संसद में एक चर्चा के दौरान बताया कि यह सेवा प्रधानमंत्री का नारा 'सहकार से समृद्धि' को पूरा करता है. उन्होंने आगे कहा कि आने वाले कुछ महीनों में हम ओला, ऊबर की तर्ज पर एक बड़े स्तर की कॉपरेटिव टैक्सी सर्विस को स्थापित करेंगे. 

उन्होंने आगे कहा कि इस सेवा से होने वाला लाभ किसी बड़े बिजनेसमैन को नहीं बल्कि ड्राइवर्स को सीधे दिया जाएगा. यह जीवन को लाना वाला मॉडल है. इस सेवा के अंतर्गत दोपहिया, रिक्शा और चार पहिया वाहनों को शामिल किया जाएगा. बता दें, जून 2022 में, राष्ट्रीय पर्यटन और परिवहन सहकारी संघ द्वारा इसी तरह की कैब-हेलिंग सेवा की घोषणा की गई थी, जो केंद्र सरकार के तहत एक शीर्ष सहकारी संगठन है.

ओला-उबर जैसी कंपनियों को चुनौती

यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब राइड-हेलिंग दिग्गज न केवल ड्राइवरों से बल्कि उपभोक्ताओं से भी आलोचना का सामना कर रहे हैं, जो अलग-अलग कीमतों का आरोप लगा रहे हैं. सोमवार को हैदराबाद में कैब ड्राइवरों ने ओला, उबर और रैपिडो जैसे राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म द्वारा दिए जाने वाले कम किराए के विरोध में 'नो एसी' अभियान शुरू किया.

तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने कहा कि कैब एग्रीगेटर्स एक समान किराया प्रणाली अपनाते हैं - जो सरकार द्वारा अनिवार्य प्रीपेड टैक्सी किराए के समान है - जिसमें ईंधन की लागत, वाहन के रखरखाव और ड्राइवरों के लिए उचित मुआवजे का हिसाब होता है.

इस साल की शुरुआत में, उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने प्रमुख कैब एग्रीगेटर्स ओला और उबर को नोटिस जारी किया था, जिसमें उपयोगकर्ताओं के मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम - एंड्रॉइड या iOS के आधार पर समान सवारी के लिए अलग-अलग मूल्य निर्धारण के आरोप लगाए गए थे.
 


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हालांकि, दोनों कंपनियों ने उपभोक्ताओं के स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम के आधार पर अलग-अलग मूल्य निर्धारण के आरोपों से इनकार किया.

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