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Taj Mahal को ढहा सकता है यमुना नदी का बहाव? जानिए सरकार का क्या है जवाब

Taj Mahal Latest News: केंद्र सरकार ने राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया है कि यमुना नदी के बहाव की वजह से आगरा के ताज महल की नींव को कोई खतरा नहीं है.

Taj Mahal को ढहा सकता है यमुना नदी का बहाव? जानिए सरकार का क्या है जवाब

ताज महल

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डीएनए हिंदी: दुनिया के अजूबों में शामिल आगरा का ताज महल (Taj Mahal) यमुना नदी के ठीक बगल में बना हुआ है. एक चिंता यह जताई जा रही थी कि यमुना नदी का प्रवाह ताज महल की नींव को हिला सकता है. इसी संबंध में राज्यसभा में एक सवाल पूछा गया था. केंद्र सरकार (Central Governement) ने राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया है कि यमुना नदी (Yamuna River) की नींव को कोई खतरा नहीं है. सरकार के मुताबिक, ताज महल की मजबूती की निगरानी अच्छे से की जा रही है और यह ऐतिहासिक इमारत पूरी तरह से सुरक्षित है.

केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में बताया कि यमुना नदी पर बांध के अभाव के चलते ताजमहल की नींव की स्थिरता को कोई खतरा नहीं है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) नियमित रूप से इसकी निगरानी कर रहा है और स्मारक अच्छी तरह संरक्षित है. राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में जल शक्ति राज्यमंत्री बिश्वेश्वर टूडू ने यह जानकारी दी.

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रबर डैम बनाने के लिए अनुमति का है इंतजार
उन्होंने कहा, 'एएसआई द्वारा सूचित किया गया है कि ताजमहल की नींव की स्थिरता को कोई खतरा नहीं है. इस संबंध में नियमित रूप से निगरानी की जा रही है और स्मारक अच्छी तरह संरक्षित है.' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में यमुना नदी पर आगरा में ताज महल के 1.5 किलोमीटर के फ्लो में एक रबर डैम के निर्माण से संबंधित एकमात्र बांध परियोजना है और इसके लिए छह विभागों या मंत्रालयों से अनुमति का इंतजार है.

मंत्री ने आगे बताया कि इस परियोजना को भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, केंद्रीय जल आयोग, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और ताज ट्रेपेजियम क्षेत्र प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण से अनुमति मिल गई है. उन्होंने कहा कि हालांकि लखनऊ स्थित राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण ने अभी तक अनुमति नहीं दी है. इसी वजह से मार्च 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन से मांगी गई अनुमति भी जारी नहीं की गई है. 

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केंद्र सरकार का काम सीमित
बिश्वेश्वर टूडू ने कहा कि बांधों का निर्माण राज्य सरकारों द्वारा उनकी प्राथमिकताओं और निधि की उपलब्धता के अनुसार योजनाबद्ध, वित्त पोषित एवं कार्यान्वित होता है. उन्होंने कहा कि इसमें भारत सरकार की भूमिका एक प्रेरक होने की है और जल शक्ति मंत्रालय की जारी योजनाओं के तहत चुनिंदा परियोजनाओं को तकनीकी और आंशिक वित्तीय सहायता मुहैया करवाने तक सीमित है. उन्होंने कहा कि फिर भी जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय जल आयोग और राज्य सरकार द्वारा अंतर राज्य प्रणालियों पर प्रस्तावित बड़ी और मझौली सिंचाई परियोजनाओं के तकनीकी आर्थिक मूल्यांकन का कार्य करता है.

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