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भारतीय सेना ने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों के पुराने इंजन बदलने के लिए अहम कदम उठाया है. वहीं जल्द ही आर्मी को 200 हाई टेक हेलीकॉप्टर मिलने वाला है, जानें सारी डिटेल्स...
पिछले दो दशक से भारतीय सेना लगभग 350 पुराने चीता-चेतक हेलीकॉप्टरों की जगह नए हल्के हेलीकॉप्टरों की मांग कर रही है. सेना के पास वर्तमान में 3 टन वजन वाले 187 हल्के यूटिलिटी हेलीकॉप्टर हैं जिनका निर्माण एचएएल ने किया है. अब भारतीय सेना ने एक अहम फैसला लिया है. भारतीय सेना ने चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों के पुराने इंजन बदलने के लिए अहम कदम उठाया है. आधुनिक तकनीक, सुरक्षा और बेहतर नियंत्रण के अभाव में इन हेलीकॉप्टरों के कई हादसे भी हुए हैं. इसी सिलसिले में भारतीय सेना ने 120 निगरानी और खोजी हेलीकॉप्टरों की जानकारी मांगी है.
आने वाले समय में भारतीय वायुसेना के लिए 80 हेलीकॉप्टर खरीदने की योजना बनाई जा रही है. इस संबंध में रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि चीता-चेतक की जगह जल्द से जल्द आधुनिक तकनीक और डिज़ाइन वाले हेलीकॉप्टर लिए जाएंगे नए हेलीकॉप्टर दिन-रात निगरानी करने, विशेष अभियानों के लिए कुछ सैनिकों को ले जाने और जमीन पर सेना के सहयोग में भी काम कर सकेंगे. ये हेलीकॉप्टर हमलावर हेलीकॉप्टरों के साथ मिलकर टोही का काम भी करेंगे.
भारतीय सेना के पास 187 हल्के यूटिलिटी हेलीकॉप्टर हैं जिनमें से 126 सेना के लिए और 61 वायु सेना के लिए हैं. इन नए हेलीकॉप्टरों के आने के बाद पुराने हेलीकॉप्टर 2027 से रिटायर हो जाएंगे.
'मेक इन इंडिया' पहल के तहत भारतीय नौसेना के लिए 60 यूटिलिटी हेलीकॉप्टर बनाने की योजना अभी शुरुआती चरण में है. इस प्रोजेक्ट के लिए जरूरी तकनीकी विशिष्टताओं को अंतिम रूप देने, खरीद प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार करने और संभावित विक्रेताओं के चयन का काम अभी चल रहा है. इससे भारतीय कंपनियों को विदेशी निर्माताओं के साथ साझेदारी करने का अवसर मिलेगा.
हालांकि प्रोजेक्ट में देरी से नौसेना की दक्षता प्रभावित होने की संभावना है. साथ ही चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों में आधुनिक उड़ान उपकरण जैसे ग्लास कॉकपिट और अच्छी नियंत्रण प्रणाली नहीं होती है. इस वजह से खराब मौसम और कम दृश्यता में उड़ान भरते समय पायलटों को भी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. इससे इन हेलीकॉप्टरों की विश्वसनीयता और सुरक्षा प्रभावित होती है.
2015 में भारत और रूस ने 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत 200 कामोव-226टी हेलीकॉप्टरों के निर्माण के लिए 2 अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इस प्रोजेक्ट के तहत थलसेना के लिए 135 और वायुसेना के लिए 65 हेलीकॉप्टर बनाए जाने थे. हालांकि लागत में बढ़ोतरी और दूसरे तकनीकी कारणों से यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका. इसकी वजह से हल्की यूटिलिटी वाले हेलीकॉप्टरों की जरूरतें अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं.
लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) एक स्वदेशी रूप से विकसित, बहु-उद्देश्यीय लड़ाकू हेलीकॉप्टर है जिसे ऊंचाई पर, पहाड़ी क्षेत्रों में और कठोर मौसम की स्थिति में संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया है. यह आधुनिक एवियोनिक्स, रात्रि दृष्टि क्षमताओं और उन्नत लक्ष्यीकरण प्रणालियों से सुसज्जित है जिससे यह दिन-रात और सभी मौसमों में मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है.
एलसीएच दुश्मन के टैंकों, बंकरों, ड्रोन और कम उड़ान वाले विमानों को निशाना बना सकता है. इसका हल्का और फुर्तीला डिजाइन इसे संकरे और दुर्गम इलाकों में भी आसानी से उड़ान भरने में सक्षम बनाता है. यह हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाले हथियार, रॉकेट और मिसाइलें ले जा सकता है जिससे यह जमीनी बलों को नजदीकी हवाई सहायता प्रदान करने में बेहद प्रभावी है.
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