Advertisement

दुनिया में हुई डीजल की किल्लत, भारत कर रहा जमकर निर्यात, ईरान युद्ध के बीच यूरोप के लिए कैसे बना संकटमोचक?

रूसी तेल पर प्रतिबंध और ईरान युद्ध के कारण यूरोप अब तक के सबसे बड़े ईंधन संकट से जूझ रहा है. इस मुश्किल समय में भारत ने कई देशों को डीजल की सप्लाई जारी रखी है.

Latest News
दुनिया में हुई डीजल की किल्लत, भारत कर रहा जमकर निर्यात, ईरान युद्ध के बीच यूरोप के लिए कैसे बना संकटमोचक?

भारत में कच्चा तेल रिफाइन करने की जबरदस्त क्षमता है. (AI इमेज)

Add DNA as a Preferred Source
  • तेल टैंकर यूरोप तक नहीं पहुंच पा रहे हैं
  • यूरोप में डीजल कार्गो की कीमत जेट फ्यूल से ज़्यादा हो गई है
  •  वर्तमान में भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है

Global Diesel Crisis: ईरान युद्ध के कारण दुनिया की ईंधन सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है. इस युद्ध के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित यूरोप हुआ है. यूरोप इस समय डीजल की किल्लत झेल रहा है. इंडस्ट्री और खेती के लिए और डीजल हासिल करने में उसे मुश्किल हो रही है. इस संकट के बीच  दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक होने के बावजूद भारत कई देशों को डीजल और अन्य ईंधन का निर्यात कर रहा है. 

यूरोप तक नहीं पहुंच पा रहा खाड़ी देशों का कच्चा तेल

पेरिस स्थित इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने अपनी अगस्त की मासिक रिपोर्ट में बताया है कि कैसे रूस, खाड़ी देशों और एशिया से यूरोप को होने वाला डीजल एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है. रिपोर्ट में बताया गया है कि यूरोप को होने वाला डीजल एक्सपोर्ट पिछले साल के मुकाबले 1.3 मिलियन बैरल प्रति दिन कम रहा. ये आंकड़ा ग्लोबल समुद्री व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत है. रूस, मिडिल ईस्ट और एशिया से जेट फ्यूल का एक्सपोर्ट भी पिछले साल के मुकाबले लगभग 670 हजार बैरल प्रति दिन कम हुआ है. ये ग्लोबल व्यापार का 34 प्रतिशत है.

यूरोप में जेट फ्यूल से महंगा हुआ डीजल

ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल टैंकर यूरोप तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक साल में पहली बार यूरोप में डीजल कार्गो की कीमत जेट फ्यूल से ज़्यादा हो गई है. यूरोपीय देशों की मुश्किल इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि इन देशों ने रूस से आने वाले डीजल और दूसरे रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट का इंपोर्ट बंद कर रखा है. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद कीमतें बढ़ने पर यूरोप अमेरिका और नाइजीरिया जैसे देशों से जेट कार्गो मंगाने में कामयाब रहा है. लेकिन, इसके बावजूद यूरोप के पास स्टॉक अब 2014 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गया है. 

भारत की भूमिका अहम हुई

ऐसे समय में जब दुनिया ईंधन संकट से जूझ रही है, भारत की भूमिका काफी अहम बनी हुई है. भारत ने जुलाई 2026 में यूरोप को अनुमानित 4.2 मिलियन से 5 मिलियन बैरल पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया. दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक भारत पिछले एक साल से ईंधन का निर्यात बढ़ा रहा है. 

घरेलू रिफाइनरियों के दम पर संकटमोचक बना भारत

भारत भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है. भारत में कच्चा तेल रिफाइन करने की जबरदस्त क्षमता है. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के मार्च के डेटा के अनुसार, भारत ने वित्तीय वर्ष-26 के दौरान 27.3 मिलियन मीट्रिक टन डीजल का निर्यात किया. वर्तमान में भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है. भारत अब 50 से ज्यादा देशों को रिफाइंड फ्यूल सप्लाई करता है.

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement