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गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट के इंजीनियर खास तौर पर एक नया 90-किलोन्यूटन (kN) वाला कोर डिजाइन कर रहे हैं. ये इंजन अभी सेवा में मौजूद लड़ाकू विमानों में मिड-लाइफ अपग्रेड के दौरान लगाए जाएंगे.
Kaveri 2.0 fighter jet engine: लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी जेट इंजन बनाना एक ऐसी तकनीकी चुनौती है जिससे भारत अब तक नहीं निपट पाया है. भारत दशकों से जेट इंजन बनाने का प्रयास कर रहा है. भारत ने तेजस विमानों के लिए देश में ही 'कावेरी' इंजन बनाया भी था, लेकिन यह अंतिम परीक्षणों में उतना ताकतवर नहीं निकला जितनी जरूरत थी. अब 'कावेरी 2.0' के विकास के साथ, लड़ाकू जेट इंजन बनाने का प्रयास एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है. आइये जानते हैं इसके बारे में विस्तार से.
'कावेरी 2.0' कार्यक्रम का लक्ष्य एडवांस्ड कंप्रेसर, कंबशन, टरबाइन और डिजिटल इंजन-कंट्रोल टेक्नोलॉजी के साथ एक नया इंजन कोर विकसित करना है. इसका दीर्घकालिक लक्ष्य विदेशी इंजनों पर भारत की निर्भरता को कम करना और देश की अपनी एयरोस्पेस क्षमताओं को मजबूत करना है. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) से जुड़े गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट (GTRE) की लैब में कावेरी जेट इंजन का स्ट्रक्चरल तौर पर पुनर्जन्म होने वाला है.
'बिजनेस टुडे' की एक रिपोर्ट के अनुसार, GTRE एक नए डिजाइन वाला 90-kN इंजन बना रहा है. इस इंजन का विकास सफल रहता है तो मिड-लाइफ अपग्रेड के दौरान IAF के फ्रंटलाइन फाइटर जेट्स के विदेशी इंजनों को स्वदेशी इंजन से बदला जा सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि GTRE, एडवांस्ड हाई थ्रस्ट क्लास इंजन (AHTCE) प्रोग्राम के तहत पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए 120kN से 140kN का इंजन विदेशी सहयोगी के साथ मिलकर बना रहा है. इसके अलावा, यह कावेरी 2.0 भी विकसित कर रहा है. नया जेट इंजन 55kN से 60kN का ड्राई थ्रस्ट पैदा करेगा और आफ्टरबर्नर के साथ यह अधिकतम 90kN से 100kN हो सकता है.
हल्के लड़ाकू विमान के लिए विकसित किए गए कावेरी डेरिवेटिव इंजन या ड्राई कावेरी इंजन ने लगभग 46 kN का ड्राई थ्रस्ट पैदा किया था. लेकिन ये धुनिक फाइटर जेट्स को उड़ाने के लिए काफी नहीं था. पिछले प्रोजेक्ट से सबक लेते हुए GTRE इंजन के कोर को फिर से डिजाइन कर रहा है. इसमें हाई-प्रेशर कंप्रेसर पर खास ध्यान दिया जा रहा है.
'कावेरी 2.0' इंजन में सिंगल-क्रिस्टल टर्बाइन ब्लेड का इस्तेमाल होने की भी उम्मीद है, जो फाइटर जेट इंजन के अंदर बहुत ज्यादा तापमान को झेल सकते हैं. अगर गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट 90kN-क्लास का स्वदेशी इंजन विकसित करने में सफल रहता है तो यह भारतीय वायुसेना के लिए णनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा. LCA तेजस फाइटर जेट्स में अभी GE F404 इंजन लगने हैं. लेकिन भविष्य में इन्हें बदलने की जरूरत भी होगी. इसलिए कावेरी 2.0 भारत को एक स्वदेशी विकल्प दे सकता है.