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G20 में ऐसे हुई थी मेहमानों की सुरक्षा, जानिए ऋषि सुनक और जो बाइडेन के होटल का क्या था कोडनेम

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक जिस होटल में रुके थे. सुरक्षा एजेंसियों ने उसका भी कोडनेम दिया था. आइए जानते हैं कि अन्य मेहमानों के होटल को क्या नाम दिए गए थे.

G20 में ऐसे हुई थी मेहमानों की सुरक्षा, जानिए ऋषि सुनक और जो बाइडेन के होटल का क्या था कोडनेम

G 20 Summit

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डीएनए हिंदी: G20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने आए विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों के लिए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे. रविवार को G20 शिखर सम्मेलन समाप्त होने के बाद दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने खुलासा किया है कि विश्व नेताओं की मेजबानी वाले इस कार्यक्रम में सुरक्षा के मद्देनजर होटलों, भारत मंडपम और राजघाट के कोडनेम दिए गए थे.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन जिस मौर्य शेरेटन होटल में रुके थे उसका नाम पंडोरा रखा गया था. वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक जिस होटल में रुके थे, सुरक्षा एजेंसियों ने उसका कोडनेम समारा रखा था. ली मेरिडियन का नाम महाबोधी तो वहीं, ताज मान सिंह होटल का नाम पैरामाउंट रखा गया था. इसके साथ ही एजेंसियों ने राजघाट का नाम रुद्रपुर और प्रगति मैदान का नाम निकेतन रखा था.

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विदेशी मेहमानों की सुरक्षा थी बड़ी चुनौती

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, विदेशी मेहमानों की सुरक्षा बड़ी चुनौती थी. इस कार्यक्रम के लिए लगभग 6 महीने से तैयारी चल रही थी. मेहमानों के आने जाने के लिए सुरक्षा कोड का इसलिए इस्तेमाल किया गया था ताकि विदेशी मेहमानों की पहचान ना हो सके. अगर कोई वायरलेस सेट पर उनकी आवाजाही के बारे में सुन भी ले तो उसे यह ना पता चले कि कौन VVIP किस जगह जा रहा है. 

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इस कोड के बारे में केवल अधिकारियों को थी जानकारी

बताया जा रहा है कि सुरक्षा को पुख्ता बनाने के लिए सड़क पर तैनात पुलिसकर्मी और ट्रैफिक के जवानों को भी इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी. उन्हें भी नहीं पता चल पा रहा था कि किसका काफिला जा रहा है, इसकी जानकारी केवल अधिकारियों को थी. जानकारी के लिए बता दें कि G20 सम्मेलन में आए सभी विदेशी मेहमानों की सुरक्षा के लिए 'रेनबो 1 से 31' तक का कोड रखा गया था. यूके के मेहमान का कोड रेनबो - 28, नीदरलैंड के मेहमान का रेनबो - 8 और अमेरिका का कोड रेनबो - 29 था. गॉड क्लब है कि मेहमानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह सारी तैयारी गृह मंत्रालय के देखरेख में हुई थी.

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