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'फ्रोजन-स्क्रीन UPI स्कैम' साइबर ठगी का एक नया तरीका है, जिसमें हैकर्स फोन स्क्रीन को फ्रीज करके यूजर का ध्यान भटकाते हैं.
सोचिए, आप फोन चला रहे हैं या कोई विज्ञापन देख रहे हैं और अचानक आपका फोन बिल्कुल फ्रीज या हैंग हो जाता है. अमूमन हम इसे फोन की एक सामान्य तकनीकी खराबी या ग्लिच मान लेते हैं. लेकिन संभल जाइए, यह कोई आम खराबी नहीं, बल्कि साइबर ठगों का एक नया और खतरनाक फ्रोजन-स्क्रीन UPI स्कैम हो सकता है.
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ठग आपके फोन की स्क्रीन को फ्रीज करके असल में आपका ध्यान भटकाते हैं और आपको डराकर गलत कदम उठाने पर मजबूर करते हैं.
क्विक हील टेक्नोलॉजीज के सीईओ हरीश कुमार ने एनडीटीवी से बातचीत में बताया कि स्क्रीन का फ्रीज होना असली खेल नहीं, बल्कि आपको उलझाने का एक जरिया है. जब आपका फोन हैंग होता है, तो स्क्रीन पर नकली एरर मैसेज या फर्जी कस्टमर केयर का नंबर आ जाता है.
इसके बाद ठग आपको डराते हैं कि आपके बैंक खाते या UPI में समस्या आ गई है. इसे ठीक करने, कैशबैक देने या वेरिफिकेशन के नाम पर वे आपसे एक फर्जी एपीके फाइल या ऐप डाउनलोड करा लेते हैं.
एक बार यह ऐप आपके फोन में आ गया, तो यह आपके फोन की एक्सेसिबिलिटी और नोटिफिकेशन पर कब्जा कर लेता है. यह ऐप चुपके से आपके एसएमएस पढ़ना, ओटीपी देखना और फोन की स्क्रीन को खुद कंट्रोल करना शुरू कर देता है.
फ्यूचर्स के उपाध्यक्ष रुचिन कुमार के मुताबिक, हैकर्स यूपीआई के सिस्टम को नहीं तोड़ते, बल्कि आपके फोन और आपकी घबराहट का फायदा उठाते हैं. ठग स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स के जरिए आपकी स्क्रीन देख रहे होते हैं. जब आप पैनिक में आकर अपना UPI PIN दर्ज करते हैं या फर्जी ऐप को परमिशन देते हैं, तो पैसे आपके ही हाथों से उनके खाते में ट्रांसफर हो जाते हैं.
बैंक या सिस्टम के लिए यह एक नॉर्मल ट्रांजैक्शन ही लगता है, क्योंकि PIN आपने खुद डाला होता है. डेलकॉम टेलीसिस्टम्स के एमडी रवींद्र सिंह का कहना है कि साइबर अपराधी लोगों के भरोसे और जल्दबाजी का फायदा उठा रहे हैं. वे एक फर्जी समस्या खड़ी करते हैं और फिर मदद करने के बहाने आपके फोन का पूरा कंट्रोल हासिल कर लेते हैं.
याद रखें, कोई भी असली बैंक या कंपनी समस्या ठीक करने के लिए कभी भी स्क्रीन शेयर करने या रिमोट ऐप डाउनलोड करने को नहीं कहती. अगर आपको लगता है कि आपके साथ फ्रॉड हुआ है, तो तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं.
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