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एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट भारत का महत्वाकांक्षी 5वीं पीढ़ी का स्वदेशी स्टेल्थ फाइटर जेट प्रोग्राम है. इसे इंडियन एयरफोर्स और नेवी के लिए DRDO के तहत आने वाली एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा डिजाइन किया जा रहा है. इस बीच रूस ने भारत को Su-57 के लिए ऑफर दिया है.
रूस ने भारत को 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट Su-57 का ऑफर दिया है, जिसमें जॉइंट प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी शेयरिंग की भी बात कही गई है. हालांकि भारत की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. इस बीच भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने रूस के साथ Su-57 की डील के बजाय भारत के स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) पर जोर दिया है. उन्होंने वॉर्निंग देते हुए कहा कि 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स की छोटी खरीद बड़े बेड़े में तब्दील हो जाएगी, जिससे भारत का AMCA प्रोजेक्ट खतरे में पड़ सकता है.
AMCA प्रोजेक्ट को मार्च 2024 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से 15 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी मिली थी. इसे फिलहाल ये भारत का 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट का एकमात्र फाइटर जेट प्रोजेक्ट है, जिस पर काम चल रहा है. पूर्व एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया का कहना है कि IAF के सामने दो विकल्प हैं- तत्काल रक्षा जरूरतों को पूरा करना या भविष्य के लिए आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना. पूर्व वायुसेना प्रमुख ने चेतावनी दी कि अगर भारत रूस के Su-57 को खरीदता है तो कब ये संख्या दो स्क्वाड्रन से चार स्क्वाड्रन तक पहुंच जाएगी ये कहना मुश्किल होगा. इस तरह के विस्तार का मतलब होगा कि AMCA का पूरा फोकस उसी पर चला जाएगा.
पूर्व वायुसेना प्रमुख ने दी ये चेतावनी
मुद्दा Su-57 की युद्ध क्षमता का नहीं है, जिसे हाल ही में एयरो इंडिया 2025 प्रदर्शनी में भारत को फिर से पेश किया गया था. बल्कि, असली खतरा सैन्य खरीद की स्पीड में निहित है. एक बार जब कोई विदेशी पांचवीं पीढ़ी का जेट भारतीय वायु सेना में शामिल हो जाता है तो उसी तरह के और जेट खरीदना बेहद लुभावना हो जाता है. इसकी वजह है- ट्रेनिंग की सुविधाएं, रखरखाव नेटवर्क, हथियार और पायलट एक्सपर्टीज पहले से ही मौजूद होती हैं. इसी वजह से एक अस्थायी समाधान आसानी से परमानेंट कमिटमेंट में बदल जाता है.
'AMCA में तेजस की तरह ना हो देरी'
आरकेएस भदौरिया का कहना है कि किसी भी विदेशी विकल्प को भारत के AMCA का स्थान नहीं लेना चाहिए. यह उनके इस लॉन्ग-टर्म विचार के अनुरूप है कि AMCA एक महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रयास है और भारत को उन एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर पूरा कंट्रोल बनाए रखना चाहिए जो उसकी भविष्य की हवाई युद्ध शक्ति को आकार देंगी. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही विदेशी फाइटर जेट के लिए AMCA को न छोड़ें, लेकिन इस प्रोजेक्ट में बहुत ज्यादा देरी भी ना हो. उन्होंने तेजस एमके-2 प्रोजेक्ट में हुई देरी का हवाला देते हुए कहा कि AMCA को उसी जाल में नहीं फंसना चाहिए.
अगर AMCA में हुई देरी तो बढ़ेगा Su-57 खरीदने का दबाव: भदौरिया
अगर AMCA प्रोजेक्ट में भी पिछले भारतीय फाइटर जेट्स प्रोजेक्ट की तरह बड़ी देरी होती है तो इससे देश की हवाई रक्षा क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण कमी आ सकती है. आखिरकार Su-57 को लेकर बहस भारतीय या रूसी विमान में से किसी एक को चुनने से कहीं अधिक समय और योजना से जुड़ी हुई है. हालांकि विदेशी जेट विमानों की एक छोटी खरीद से क्षमता की कमी को अस्थायी रूप से दूर किया जा सकता है, लेकिन पूर्व आईएएफ चीफ को आशंका है कि इसे सख्ती से सीमित रखना होगा ताकि यह AMCA के बजट पर बोझ न डाले. अगर भारतीय जेट में देरी होती है तो रणनीतिक खतरा बढ़ जाता है. यदि AMCA प्रोजेक्ट तय की गई डेडलाइन तक नहीं आ पाता है तो और ज्यादा Su-57 खरीदने का दबाव बढ़ जाएगा.
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