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शंभू बॉर्डर: किसानों का 'दिल्ली चलो' मार्च स्थगित, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले, 9 लोग घायल

Farmers Delhi March: पंजाब-हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे 101 किसानों का एक जत्था रविवार को दिल्ली के लिए निकला था, लेकिन पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर प्रदर्शनकारियों को आगे नहीं बढ़ने दिया.

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शंभू बॉर्डर: किसानों का 'दिल्ली चलो' मार्च स्थगित, पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले, 9 लोग घायल

farmers protest on shambhu border

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न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानूनी गारंटी और अन्य मांगों को लेकर शंभू बॉर्डर पर डटे किसानों ने रविवार को दिल्ली कूच शुरू किया, लेकिन पुलिस ने बहुस्तरीय  बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया. प्रदर्शनकारी किसानों ने जब बैरिकेडिंग के पास पहुंचने की कोशिश की तो पुलिस ने आंसू गैस के गोले दाग दिए. जिसकी वजह से कुछ किसान घायल हो गए हैं. किसानों ने एक दिन के लिए 'दिल्ली चलो' मार्च स्थगित कर दिया है.

किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा, 'आज हमने दिल्ली कूच करने वाला 'जत्था' वापस लेने का फैसला किया है. एक किसान को PGI में भर्ती कराया गया है. उसकी हालत गंभीर है. पंढेर ने कहा कि 8-9 किसान घायल हैं. इसलिए हमने 'जत्था' वापस ले लिया है. किसान अपनी मांगें पूरी होने तक नहीं रुकेगा. हम बैठक के बाद आगे के कार्यक्रम के बारे में बताएंगे.'

101 किसानों का जत्था कर रहा था दिल्ली कूच
दरअसल, MSP के लिए कानूनी गारंटी सहित विभिन्न मांगों को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए 101 किसानों के एक समूह ने पंजाब-हरियाणा सीमा पर शंभू प्रदर्शन स्थल से रविवार दोपहर 12 बजे के बाद दिल्ली के लिए अपना पैदल मार्च फिर शुरू किया था. कुछ मीटर आगे बढ़ने के बाद किसानों को हरियाणा पुलिस की ओर से लगाए गए भारी बैरिकेडिंग का सामना करना पड़ा. 

इससे पहले शुक्रवार को भी सुरक्षाकर्मियों ने मार्च कर रहे किसानों पर आंसूगैस के गोले दागे थे, जिसके बाद किसानों ने दिल्ली कूच स्थगित कर दिया था.

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नोएडा में किसान भूख हड़ताल पर
वहीं, यूपी के ग्रेटर नोएडा के किसान भूख हड़ताल पर बैठे हैं. यह जानकारी संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने दी है. SKM ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर की जिला जेल में बंद ग्रेटर नोएडा के किसान अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए भूख हड़ताल कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि किसानों की कुछ मांगें काफी समय से लंबित पड़ी हैं, जिसमें 10 प्रतिशत भूमि आवंटन सुनिश्चित करने वाले नए कानून का कार्यान्वयन भी शामिल है.  एसकेएम ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे किसानों को जबरन हिरासत में ले लिया गया.

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