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नंद किशोर गोयनका का अंतिम संस्कार, श्रद्धांजलि देने उमड़े हजारों लोग, हर आंख हुई नम

एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा के पिता नंद किशोर गोयनका का 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था. उनकी इस अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए.

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नंद किशोर गोयनका का अंतिम संस्कार, श्रद्धांजलि देने उमड़े हजारों लोग, हर आंख हुई नम

नंद किशोर गोयनका को अंतिम विदाई

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एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा के पिता नंद किशोर गोयनका का बुधवार (15 जुलाई 2026) को अंतिम संस्कार किया गया. हिसार के अग्रोहा धाम में गोयनका उद्यान में उन्हें मुखाग्नि दी गई. नंद किशोर गोयनका को अंतिम विदाई देने के लिए सड़कों पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा. अंतिम यात्रा में शामिल हजारों लोग नम आंखों के साथ 'बाबू जी अमर रहें...' के नारे लगाए. 

नंद किशोर गोयनका का निधन सोमवार 13 जुलाई को 96 वर्ष की आयु में मुंबई स्थित उनके निवास स्थान पर हुआ था. सोमवार को उनका पार्थिव शरीर मुंबई में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था, जहां उद्योग, कला और राजनीति जगत की तमाम हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. इसके बाद, मंगलवार यानी 14 जुलाई को उनके पार्थिव शरीर को विशेष रूप से मुंबई से हिसार लाया गया. हिसार पहुंचने पर स्थानीय निवासियों, शुभचिंतकों और परिजनों ने उनके अंतिम दर्शन किए.

अग्रोहा धाम में दिग्गज हस्तियों का तांता

नंद किशोर गोयनका को अंतिम सम्मान देने और गोयनका परिवार को सांत्वना देने के लिए अग्रोहा धाम में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के कई दिग्गजों का जमावड़ा लगा. इस अंतिम यात्रा और शोक सभा में शामिल होने के लिए- हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, हरियाणा के कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा, राज्यसभा सांसद सुभाष बराला, हांसी के विधायक विनोद भ्याना, हरियाणा के पूर्व मंत्री कमल गुप्ता, आदमपुर के विधायक चंद्रप्रकाश, राजस्थान (नौहर) के विधायक अमित चाचाण सहित देश-प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता, उद्योगपति और समाज सेवी पहुंचे.

गौसेवा और राष्ट्र को समर्पित जीवन

28 सितंबर 1930 को जन्मे नंद किशोर गोयनका का जीवन सादगी, राष्ट्रभक्ति और परोपकार का एक अनुपम उदाहरण था. वे एस्सेल ग्रुप जैसे बड़े औद्योगिक साम्राज्य के स्तंभ होने के बावजूद हमेशा व्यावसायिक चकाचौंध से दूर रहे. वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक अत्यंत समर्पित और निष्ठावान स्वयंसेवक थे, जिन्होंने संघ में कई महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी भरे दायित्वों का निर्वहन किया.

उनका पूरा जीवन मुख्य रूप से सामाजिक कल्याण, मानवता की भलाई और निस्वार्थ गौसेवा के लिए समर्पित रहा. यही वजह है कि उनके निधन पर आज न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश की सियासी, धार्मिक और सामाजिक हस्तियां गहरा दुख व्यक्त कर रही हैं. 

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