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उद्धव ठाकरे के तंज पर एकनाथ शिंदे का पलटवार- शिवसेना तुम्हारी प्राइवेट कंपनी नहीं

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बुधवार को कहा कि बाल ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना की थी. यह पार्टी किसी की निजी कंपनी नहीं है. यह सभी की है.

उद्धव ठाकरे के तंज पर एकनाथ शिंदे का पलटवार- शिवसेना तुम्हारी प्राइवेट कंपनी नहीं

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे. (फाइल फोटो-PTI)

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डीएनए हिंदी: महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजधानी मुंबई में दशहरे पर शिवसेना के दोनों गुटों की ओर से मेगा रैली आयोजित की गई. रैली में शिवसेना (Shiv Sena) के दोनों धड़ें ने एक-दूसरे पर जमकर हमला बोला. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर बड़ा पलटवार करते हुए कहा कि बाल ठाकरे द्वारा स्थापित पार्टी किसी की निजी कंपनी नहीं है और यह सभी की है. उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ बाल ठाकरे के बेटे होने की वजह से वे शिवसेना के उत्तराधिकारी नहीं हो जाएंगे.

एकनाथ शिंदे ने बीकेसी के एमएमआरडीए मैदान में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, 'यह तुम्हारी (उद्धव ठाकरे) प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं है. शिवसेना शिव-सैनिकों की है, जिन्होंने इसके लिए अपना पसीना बहाया है. यह आप जैसे लोगों के लिए नहीं है, जिन्होंने पार्टनरशिप की और इसे बेच दिया.'

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'उद्धव ठाकरे ने की जनता से गद्दारी'

उद्धव ठाकरे के गद्दार वाले बयान के जवाब में एकनाथ शिंदे ने कहा कि सच्ची 'गद्दारी' 2019 में हुई थी. शिवसेना ने पीएम नरेंद्र मोदी के साथ बाल ठाकरे की तस्वीरें बैनर पर लगाईं. लोगों ने यह सोचकर मतदान कर दिया कि गठबंधन होगा, लेकिन आप कुछ और कर बैठे.

'बाल ठाकरे से माफी मांगे उद्धव ठाकरे'

एकनाथ शिंदे ने कहा, 'महाराष्ट्र के मतदाताओं ने आपको और बीजेपी को विधानसभा चुनाव में चुना, लेकिन आपने कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन करके लोगों को धोखा दिया. महाराष्ट्र के सीएम ने उद्धव ठाकरे को मुंबई में बाल ठाकरे के स्मारक पर घुटने टेकने और महाराष्ट्र के लोगों से विश्वासघात के लिए माफी मांगने को कहा.

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उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे को क्या कहा था?

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने शिवाजी पार्क में दशहरा रैली को संबोधित करते हुए एकनाथ शिंदे को गद्दार कहा था. उन्होंने कहा था कि एकनाथ शिंदे ने उनकी पीठ में छूरा घोंपा है. उन्होंने कहा कि मुझे केवल एक चीज खराब लगी और गुस्सा भी आया कि जब मुझे अस्पताल में भर्ती कराया गया था तब जिन लोगों को मैंने राज्य की जिम्मेदारी दी, वे 'कटप्पा' बन गए और धोखा दिया. वे मुझे काट रहे थे और सोच रहे थे कि मैं अस्पताल से कभी नहीं लौटूंगा.

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