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Anil Ambani: उद्योगपति अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई कंपनियों द्वारा वित्तीय अनियमितताओं और 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के हेरफेर के कारण ईडी अनिल अंबानी से पूछताछ कर रहा है.
Anil Ambani ED News: उद्योगपति अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ -साथ कई कंपनियों
के पैसों के लेन -देन में गड़बड़ी पर शक और 17,000 करोड़ रूपये से अधिक के ग्रुप लोन की राशि में गड़बड़ी के कारण ED अनिल अंबानी से पूछताछ कर रहा है. इस मामले में उद्योगपति रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही है.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस ग्रुप की ऑर्गेनाइजेशन से जुड़े लोन फ्रॉड मामले में अनिल अंबानी को फिर से समन भेजा गया है. 17,000 करोड़ रूपये के बैंक फ्रॉड मामले में मंगलवार अनिल अंबानी को ED के समक्ष पेश किया गया. अब अनिल अंबानी से दोबारा ईडी पूछताछ कर सकती है.
सूत्रों के अनुसार बताया गया है कि ED अनिल अंबानी को पूछताछ के लिए हाजिरी का निर्देश दे सकता है. अगर ऐसा होता है तो अंबानी को अगले 7 से 10 दिन में उन्हें जांच एजेंसी के सामने पेश होना पड़ेगा. क्योंकि उन्होंने कहा है कि मामले से जुड़े दस्तावेज एकत्रित करने के लिए समय चाहिए. लोन फ्रॉड मामले में अंबानी के बैंकिंग की जांच करनी होगी.
अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों से जुड़े आरोपित गैरकानूनी लोन फ्रॉड मामले में ईडी की जांच चल रही है. ED ने अंबानी के खिलाफ LOOKOUT सर्कुलर (LOC) भी जारी की है. ED की जांच के तहत रिलांयस ग्रुप के अधिकारियों को भी इस हफ्ते पेश किया गया है. ऐसे ही जुड़े मामले में ED ने हाल में ही ओडिशा की एक कंपनी के MD पार्थ सारथी बिस्वाल को अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनी के लिए 68 करोड़ रुपये की फेक बैंक गारंटी देने के आरोप में गिरफ्तार किया था.
17,000 करोड़ रूपयों के ग्रुप लोन की राशि के हेरफेर से जुड़ी यह कार्रवाई जिसमें पहला आरोप 2017 और 2019 के बीच यस बैंक ने अंबानी ग्रुप की कंपनियों को लगभग 3000 करोड़ रुपये दिए गए जो गैर -कानूनी लोन के गलत इस्तेमाल से जुड़े है. कथित तौर पर लोन को जुड़े ऑर्गेनाइजेशन से कई ग्रुप ऑफ कंपनियों में भेजा गया है.
सेबी की रिपोर्ट के अनुसार ईडी जिस दूसरे आरोप की जांच कर रही है. रिलायंस ने सीएलई के जरिए रिलायंस समूह की कंपनियों में अंतर -कॉरपोरेट (ICD) के रूप में गुप्त राशी का हेरफेर किया गया है. आर इंफ्रा के ऊपर आरोप है कि शेयर हॉल्डर और ऑडिट समिति से बचने के लिए सीएलई को अपनी कंपनी में नहीं दिखाया है.
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