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क्या है 700 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी का मामला? ED ने सपा नेता विनय शंकर तिवारी को किया गिरफ्तार

विनय शंकर तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने प्रमोटरों और निवेशकों के साथ मिलकर बैंक ऑफ इंडिया (BOI) को करीब 754.24 करोड़ रुपये का चूना लगाया था.

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क्या है 700 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी का मामला? ED ने सपा नेता विनय शंकर तिवारी को किया गिरफ्तार

Vinay Shankar Tiwari

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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता विनय शंकर तिवारी को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है. ईडी ने 700 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी मामले में एक्शन लिया है. जांच एजेंसी ने सोमवार को पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी के लखनऊ, गोरखपुर और नोएडा समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की थी. तिवारी के साथ उनकी कंपनी के MD अजीत पांडेय को भी गिरफ्तार किया गया है.

विनय शंकर तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रमोटरों और निवेशकों के साथ मिलकर बैंक ऑफ इंडिया (BOI) ने नेतृत्व वाले 7 बैंकों के कंसोर्टियम से 1129.44 करोड़ रुपये का क्रेडिट लाभ लिया था. इस पैसे को उन्होंने अलग-अलग कंपनियों को डायवर्ट कर दिया था. इन कंपनियों ने बैंकों से लिया पैसा वापस नहीं किया. इससे Bank of India को करीब 754.24 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था.

72 करोड़ की संपत्ति हो चुकी है जब्त

ईडी विनय शंकर तिवारी को गिरफ्तार कर लखनऊ ले गई है. इससे पहले नवंबर 2023 में उनकी 72.08 करोड़ रुपये की कुल 27 संपत्तियों को जब्त कर लिया गया था. तिवारी की कंपनी गंगोत्री इंटरप्राइजेस लिमिटेड द्वारा बैंकों के कंसोर्टियम का करोड़ों रुपये हड़पने का आरोप है. बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर CBI ने भी उनके खिलाफ केस दर्ज कर रखा है.

विनय तिवारी चिल्लूपार सीट से पूर्व विधायक रह चुके हैं. समाजवादी पार्टी से पहले वह BSP में थे. साल 2021 में मायावती का साथ छोड़ अखिलेश यादव के साथ आ गए थे. उनके पिता हरिशंकर तिवारी भी चिल्लूपार से 6 बार विधायक रह चुके थे. हरिशंकर तिवारी का नाम यूपी के बाहुबली नेताओं में गिना जाता था. पूर्वांचल के ब्राह्मणों में उनका अलग ही रुतबा था.

उत्तर प्रदेश में साल 1997 से 2007 के बीच जिसकी भी सरकार रही, उसमें हरिशंकर तिवारी मंत्री जरूर बने. वह गोरखपुर जिले के चिल्लूपार सीट से 1985 से 2007 तक लगातार 5 बार विधायक रहे थे. हरिशंकर ने पहला चुनाव 1985 में लड़ा था.

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