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पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में आये भूकंप का सेंटर जमीन के अंदर करीब 9 किलोमीटर नीचे था. इसकी तिव्रता तो कम थी, लेकिन इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता. हालांकि गनीमत रही कि इसकी वजह से कोई हानि नहीं हुई.
पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में शुक्रवार सुबह धरती कांप गई. यहां सुबह करीब 6 बजकर 56 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किये गये. भूकंप की तीव्रता 3.0 मापी गई है. इसे मामूली श्रेणी में रखा जाता है. वहीं गनीमत रही कि अब तक भूकंप के चलते किसी भी तरह के जान माल की हानि की कोई खबर नहीं है, लेकिन इस छोटे झटके ने हर घर में एक गहरा डर और चिंता छोड़ दी है. सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक सामान्य झटका था या किसी बड़े खतरे की चेतावनी. आइए जानते हैं कि इस प्राकृतिक हलचल का आपकी रोजमर्रा की जिंदगी और सुरक्षा पर क्या असर पड़ सकता है।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने आधिकारिक हैंडल से इस भूकंप की जानकारी शेयर की है. इसमें एजेंसी ने बताया कि भूकंप का केंद्र अक्षांश 26.445 उत्तर और देशांतर 89.560 पूर्व पर स्थित था. वहीं भूकंप की गहराई जमीन से करीब 9 किलोमीटर नीचे थी. भूकंप का केंद्र अलीपुरद्वार जिले में ही रहा, जो पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में स्थित है. यह भूटान और असम की सीमा के पास पड़ता है.
जब अचानक पंखे और बर्तन हिलने लगते हैं, तो इंसान सबसे पहले अपने परिवार की सुरक्षा के बारे में सोचता है. अलीपुरद्वार और आसपास के इलाकों में जैसे ही धरती डोली, लोग सहमकर अपने घरों से बाहर खुले आसमान के नीचे आ गये. भूकंप की तीव्रता भले ही 3.6 हो और सुनने में छोटी लगे, लेकिन जो लोग मल्टी-स्टोरी इमारतों या पुराने मकानों में रहते हैं, उनके लिए यह सिहरन पैदा करने वाला अनुभव था।
एक्सपर्ट्स की मानें तो इसे कम तीव्रता का भूकंप माना जा सकता है, लेकिन पर्यावरणविदों और भू-विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार छोटे झटके आना इस बात का प्रमाण है कि जमीन के भीतर टेक्टोनिक प्लेट्स में लगातार हलचल और ऊर्जा का संचय हो रहा है, जो एक बड़े भूकंप का संकेत हो सकता है. क्योंकि कभी भी बड़े भूकंप हमेशा चेतावनी देकर नहीं आते, बल्कि कई बार ऐसे छोटे-छोटे झटके बड़े खतरे से पहले का ट्रेलर साबित होते हैं. पूर्वोत्तर भारत और पश्चिम बंगाल का यह बेल्ट सिस्मोलॉजिकल लिहाज से संवेदनशील ज़ोन में आता है, जहां जमीन के अंदर का तनाव लगातार बढ़ रहा है.