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दुनिया के चुनिंदा ताकतवर देशों के क्लब में भारत की एंट्री, DRDO ने रचा नया इतिहास

भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन (DRDO) ने महज 24 घंटे के भीतर एक के बाद एक लगातार तीन मिसाइलों का सफल परीक्षण करके रक्षा क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है.

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दुनिया के चुनिंदा ताकतवर देशों के क्लब में भारत की एंट्री, DRDO ने रचा नया इतिहास

एलीट क्लब में भारत की एंट्री (Image Source- DRDO)

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  • महज 24 घंटे के भीतर एक के बाद एक लगातार तीन मिसाइलों के सफल फ्लाइट टेस्ट किए
  • दुनिया के चुनिंदा शक्तिशाली देशों के एलीट क्लब में शामिल हुआ भारत
  • चीन और पाकिस्तान के गठजोड़ को करारा जवाब
  • सेना द्वारा अंतिम टेस्ट की प्रक्रिया पूरी होते ही इन्हें देश की सीमाओं पर तैनात कर दिया जाएगा

भारतीय रक्षा क्षेत्र से एक ऐसी बड़ी और गर्व करने वाली खबर आई है, जिसने पूरी दुनिया के बड़े और ताकतवर देशों का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है. भारत के रक्षा अनुसंधान संगठन यानी डीआरडीओ (DRDO) ने 10 और 11 जून को महज 24 घंटे के अंदर एक के बाद एक लगातार तीन मिसाइलों के सफल परीक्षण करके एक नया इतिहास रच दिया.

इस बड़ी कामयाबी के साथ ही भारत अब दुनिया के उन बेहद चुनिंदा और शक्तिशाली देशों की कतार में शामिल हो गया है, जिनके पास आसमान से लेकर अंतरिक्ष तक और समंदर की गहराइयों से लेकर लंबी दूरी की मिसाइलों को पलक झपकते ही हवा में ही खत्म करने की अचूक ताकत मौजूद है. 

इंटर-कॉन्टिनेंटल मिसाइलों का भी निकाला तोड़

भारत ने इन दो दिनों में लगातार तीन मिसाइलों के सफल फ्लाइट टेस्ट करके अपनी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और समंदर में दुश्मन के जहाजों को नष्ट करने वाली क्षमताओं का लोहा मनवाया है. इस रणनीतिक कामयाबी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि भारत के पास अब ऐसी तकनीक आ गई है जो दुश्मन की इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों को भी रास्ते में ही ढे़र कर सकती है. इस एतिहासिक सफलता पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और डीआरडीओ के चीफ राजेश कुमार सिंह ने वैज्ञानिकों, इस प्रोजेक्ट से जुड़ी कंपनियों और देश की सेना को बधाई दी है।

इन परीक्षणों की बड़ी बातें

  • 24 घंटे में तीन सफल टेस्ट- डीआरडीओ ने बहुत ही मुश्किल और पेचीदा मिशन को पूरा करते हुए सिर्फ एक दिन के भीतर तीन बड़े मिसाइल टेस्ट किए. यह दिखाता है कि भारत की हवाई सुरक्षा प्रणाली कितनी आधुनिक और मजबूत हो चुकी है.

  • लंबी दूरी की मिसाइलों का खात्मा- शीर्ष सरकारी सूत्रों ने एचटी को बताया कि भारत ने दो ऐसे इंटरसेप्टर मिसाइलों का टेस्ट किया है जो 2,000 से लेकर 5,000 किलोमीटर की दूरी से आने वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिरा सकती हैं.

  • अंतरिक्ष से लेकर हवा तक सुरक्षा- ये खास इंटरसेप्टर मिसाइलें अंतरिक्ष और धरती के वायुमंडल के अंदर, दोनों ही जगहों पर दुश्मन की मिसाइल को ढूंढकर उसे पूरी तरह तबाह करने की ताकत रखती हैं.

  • समुद्री सीमा पर बढ़ी ताकत- इसी टेस्ट के दौरान डीआरडीओ ने पहली बार मध्यम दूरी की नौसैनिक एंटी-शिप मिसाइल का भी पहला सफल टेस्ट किया. इससे भारतीय नौसेना की समंदर में मार करने की क्षमता कई गुना बढ़ गई है.

 

पड़ोसी देशों के खतरे का सटीक जवाब

यह परीक्षण भारत की सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी समय पर हुआ है. हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान लगातार फतेह-1, फतेह-2 और चीन की मदद से बनी P282 जैसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें तैयार कर रहा है. ऐसे में चीन और पाकिस्तान के मिसाइल गठजोड़ का मुकाबला करने के लिए भारत को इस तरह के अभेद्य सुरक्षा चक्र की बहुत जरूरत थी. यह कामयाबी दक्षिण एशिया में शक्ति के संतुलन को पूरी तरह भारत के पक्ष में मजबूत करती है.

अब आगे क्या होगा?

इन मिसाइलों के शुरुआती और तकनीकी टेस्ट पूरी तरह सफल रहे हैं. यह सिर्फ साइंस के मामले में एक बड़ी उपलब्धि नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा को सीधे तौर पर मजबूत करने वाला कदम है. अब इन इंटरसेप्टर मिसाइलों को बहुत जल्द यूजर ट्रायल्स के लिए भेजा जाएगा, जिसका मतलब है कि देश की सेना खुद इनका अंतिम टेस्ट करेगी. इस अंतिम प्रक्रिया के पूरा होते ही इन्हें देश की सीमाओं पर तैनात कर दिया जाएगा, जिससे भारत की सुरक्षा हमेशा के लिए पक्की हो जाएगी.

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