भारत
हेमंत सोरेन सरकार को कांग्रेस और JMM का समर्थन हासिल है. राष्ट्रपति चुनाव में आदिवासी प्रत्याशी की मौजूगी ने उनकी समस्या बढ़ा दी है.
डीएनए हिंदी: NDA के उम्मीदवार के रूप में आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू के नाम की घोषणा ने JMM के लिए दुविधा खड़ी कर दी है कि वह देश को पहला आदिवासी राष्ट्रपति देने में अपना योगदान दे या फिर गठबंधन धर्म का पालन करे. मुर्मू मूल रूप से ओड़िशा के मयूरभंज जिले की रहने वाली हैं और वह आदिवासी समुदाय संताल (संथाल) से ताल्लुक रखती हैं. झारखंड की राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल भी निर्विवाद रहा है जबकि संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का भी झारखंड से गहरा नाता रहा है.
बिहार की राजधानी पटना में जन्मे यशवंत सिन्हा हजारीबाग संसदीय सीट से चुनाव जीतकर ही केंद्र सरकार में वित्त और विदेश मंत्री बने और फिर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी एक पहचान कायम की. वह तीन बार संसद में हजारीबाग क्षेत्र से भाजपा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं जबकि पिछले दो चुनावों में उनके पुत्र जयंत वहां से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज कर रहे हैं.
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वर्तमान में पृथक झारखंड राज्य आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाला तथा आदिवासी अस्मिता हितैषी राजनीति करने वाला JMM राज्य सरकार का नेतृत्व कर रहा है. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली इस सरकार को कांग्रेस और RJD का समर्थन हासिल है. मुर्मू की उम्मीदवारी की घोषणा के कुछ समय बाद ही आदिवासी बहुल राज्य ओड़िशा की सत्ताधारी BJD ने उन्हें समर्थन देने की घोषणा कर दी. लेकिन अभी तक इस बारे में JMM की कोई स्पष्ट राय नहीं आई है कि वह राष्ट्रपति के रूप में NDA उम्मीदवार का समर्थन करेगा या विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के साथ जाएगा.
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इस बारे में जब JMM नेताओं से बात की गई तो उनमें से अधिकांश ने कहा कि पार्टी के लिए इस बात को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा कि मुर्मू देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति बनने की ओर अग्रसर हैं. पार्टी के एक नेता ने कहा कि इस बारे में अंतिम फैसला तो पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा लेकिन बहुत ही कम लोगों को पता है कि मुर्मू और "दिशुम गुरु" यानी शिबू सोरेन के परिवार के बीच निकट संबंध हैं और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना उसी मयूरभंज जिले की हैं, जहां से मुर्मू आती हैं. उन्होंने कहा, "वैचारिक रूप से भाजपा के उम्मीदवार का समर्थन करना बेशक अटपटा लगे...लेकिन राजनीति में पहले भी ऐसा होता आया है कि स्थानीय हित वैचारिक मुद्दों पर भारी पड़ जाते हैं."
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लोकसभा में JMM के एकमात्र सांसद विजय कुमर हंसदक से PTI ने बात की तो उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव पर पार्टी का जो भी रुख होगा, उससे जल्द ही सभी को अवगत करा दिया जाएगा. यह पूछे जाने पर कि क्या मुर्मू की उम्मीदवारी ने JMM के लिए दुविधा वाली स्थिति पैदा कर दी है, उन्होंने कहा, "पार्टी के लिए दुविधा वाली स्थिति क्यों होगी? पार्टी फोरम पर इस बारे में चर्चा होना अभी बाकी है."
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हालांकि उन्होंने NDA का उम्मीदवार घोषित किए जाने के लिए "द्रौपदी मैम" को बधाई दी और कहा, "इस घोषणा से बिल्कुल हमारे समाज के लोग खुश हैं. इस बात को हम खुशी-खुशी स्वीकार भी करते हैं लेकिन जहां तक पार्टी की बात है तो कोई भी निर्णय लेने से पहले उस बारे में पार्टी में चर्चा होती है. भाजपा ने कल ही अपने उम्मीदवार की घोषणा की है. कुछ समय इंतजार कर लीजिए. चर्चा के बाद आपको बता दिया जाएगा."
राजमहल झारखंड का सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र है और शुरू से ही यह संताल राजनीति का केंद्र रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस संसदीय क्षेत्र में 37 प्रतिशत आबादी आदिवासी, जिनमें अधिकांश संताल हैं. इसकी छह में से चार विधानसभा सीटें भी आरक्षित हैं. साल 2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड की आबादी में आदिवासियों का हिस्सा 26.2 प्रतिशत है. संताल यहां सबसे अधिक आबादी वाली अनुसूचित जनजाति है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक यहां की कुल आदिवासी आबादी में करीब 31 प्रतिशत संताल है. अन्य में मुंडा, ओरांव, खरिया, गोड कोल कंवार इत्यादी शामिल हैं.
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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने कहा कि राष्ट्रपति का चुनाव झामुमो के लिए परीक्षा की घड़ी है. उन्होंने कहा, "JMM आदिवासियों की हितैषी होने का जो दावा करती है... इस समय उसके समक्ष परीक्षा की घड़ी है...कि वह जनजातीय समाज की एक महिला को सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बिठाना चाहता है या कांग्रेस की गोद में खेलना चाहता है."
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