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'मेरे टैरिफ हटाए तो 1929 जैसी तबाही होगी', ट्रम्प ने फिर दी धमकी और कहा- उन्हें ये बात कर रही परेशान

What was the American Great Depression of 1929?: ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यदि कोई कट्टरपंथी वामपंथी अदालत टैरिफ हटाने का फैसला सुनाती है, तो अमेरिका कभी भी आर्थिक रूप से उबर नहीं पाएगा.

'मेरे टैरिफ हटाए तो 1929 जैसी तबाही होगी', ट्रम्प ने फिर दी धमकी और कहा- उन्हें ये बात कर रही परेशान

डोनाल्ड ट्रंफ की भारत पर टैरिफ को लेकर नई धमकी

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What is bothering Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है. इस बार उन्होंने अमेरिकी न्यायपालिका और वैश्विक व्यापार व्यवस्था को सीधे तौर पर धमकी दी है. ट्रंप ने कहा कि अगर अदालत उनकी टैरिफ नीति के खिलाफ फैसला देती है, तो अमेरिका एक और महामंदी का सामना करेगा. यह भी 1929 जैसी महामंदी होगी. ट्रंप का दावा है कि उनके टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मज़बूत करेंगे. लेकिन अगर अदालत टैरिफ को खारिज कर देती है, तो इससे देश का आर्थिक संतुलन बिगड़ जाएगा.

उन्होंने इसे 1929 जैसी महामंदी की शुरुआत बताया. आइए समझते हैं कि ट्रंप के इस बयान को खतरनाक क्यों माना जा रहा है. टैरिफ का अमेरिकी बाजार पर क्या असर होगा और 1929 की महामंदी कैसी थी?

अदालती फैसले के कारण संकट?
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अगर कोई कट्टरपंथी वामपंथी अदालत टैरिफ हटाने का फैसला करती है, तो अमेरिका आर्थिक रूप से कभी उबर नहीं पाएगा. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ, तो 1929 जैसी महामंदी होगी. विनाश निश्चित है. हम धन, शक्ति और सम्मान को कभी वापस नहीं ला पाएंगे.
 
ट्रम्प ने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा कि अगर अदालत को टैरिफ के खिलाफ फैसला देना ही था, तो उसे मामले की शुरुआत में ही ऐसा कर देना चाहिए था. देश अभी अपनी आर्थिक उपलब्धियों के शिखर पर है, और ऐसे समय में ऐसा फैसला लेना खतरनाक होगा.

'मेरे टैरिफ हटाए तो 1929 जैसी तबाही होगी', ट्रम्प ने फिर दी धमकी और कहा- उन्हें ये बात कर रही परेशान

ट्रम्प का तर्क - टैरिफ से लाभ
ट्रंप ने दावा किया है कि टैरिफ से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फ़ायदा हुआ है. अरबों डॉलर अमेरिकी ख़ज़ाने में आ रहे हैं. शेयर बाज़ार पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ा है. उन्होंने इसे अमेरिका के लिए धन और शक्ति के सबसे बड़े युग का प्रतीक बताया है. हालाँकि, उनकी नीतियों की आलोचना भी हो रही है. कई अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि टैरिफ से उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ेगा और मुद्रास्फीति बढ़ेगी.
 
1910 के बाद से उच्चतम टैरिफ दर
विश्व व्यापार संगठन और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, अमेरिका में औसत टैरिफ दर 20.1 प्रतिशत तक पहुँच गई है. यह दर 1910 के दशक के बाद से सबसे ज़्यादा है. जबकि ट्रंप के कार्यकाल की शुरुआत में यह दर सिर्फ़ 2.4 थी. इस साल मई में चीन पर टैरिफ़ बढ़ोतरी के बाद यह दर 24.8 प्रतिशत हो गई. जो 1904 के बाद से एक रिकॉर्ड था. फ़िलहाल, अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ़ युद्ध पर एक अस्थायी विराम लग गया है, लेकिन अगले हफ़्ते यह सच्चाई भी ख़त्म हो रही है.
 
1929 की महामंदी क्या थी?
1929 में अमेरिका में शेयर बाज़ार धराशायी हो गया था. इसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई सालों तक बर्बाद कर दिया था. बेरोज़गारी अपने चरम पर पहुँच गई थी. बैंक और कंपनियाँ दिवालिया होने लगीं. दुनिया भर की अर्थव्यवस्था ठप्प पड़ गई थी. ट्रंप की चेतावनी इसी इतिहास की ओर इशारा करती है. वह कहना चाहते हैं कि अगर अदालत टैरिफ़ को पलट देती है, तो अमेरिका फिर से इसी आर्थिक नरक से गुज़र सकता है.

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