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भारतीय नौसेना चुपचाप अपनी ताकत में इजाफा कर रही है. नेवी के बेड़े में अनमैंड सरफेस वेसल शामिल किए जा रहे हैं. सैटेलाइट से नियंत्रित होने वाली ये नावें सैकड़ों किलोमीटर का सफर बिना किसी चालक के तय कर सकती हैं.
Indian Navy Unmanned Surface Vessels: मानवरहित ड्रोन आधुनिक युद्ध के मैदान में सबसे कारगर हथियार बनके उभरे हैं. ड्रोन का इस्तेमाल सिर्फ सेना या वायुसेना ही नहीं कर रहीं, दुनिया भर की नौसेनाएं भी अब मानवरहित ड्रोन बोट को अपने बेड़े में शामिल कर रही हैं. इस महीने 12 जुलाई, 2026 को अमेरिका नौसेना ने ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह पर मौजूद नौसैनिक ठिकानों पर विस्फोटक से लदी 'सारोनिक कोर्सेर' बोटों से हमला किया. अमेरिका ने इस हमले की फुटेज भी जारी की. इसके बाद से भारत में भी ये चर्चा तेज हो गई कि क्या इंडियन नेवी के पास मानवरहित ड्रोन बोट्स हैं? आइये जानते हैं इस सवाल का जवाब.
अनमैंड सरफेस वेसल या बिना चालक वाले पोतों को संचालित करने के मामले में भारतीय नौसेना दुनिया की कुछ चुनिंदा नौसेनाओं में से एक है. इंडियन नेवी साल 2024 से ही मानवरहित ड्रोन बोट को ऑपरेट कर रही है. पुणे की डिफेंस कंपनी 'सागर डिफेंस इंजीनियरिंग' ने 13 मीटर लंबी एक मानवरहित ड्रोन बोट बनाई थी जिसने मुंबई से तूतीकोरिन तक 1500 किलोमीटर का सफर तय किया था. इसे 'मतंगी' नाम दिया गया है. खास बात ये है कि 'मतंगी' देश में ही बनी AI-आधारित कंट्रोल सुइट से नियंत्रित होती है जिसे 'जेनेसिस' कहा जाता है.
भारतीय नौसेना ने अपनी 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा और 23 लाख वर्ग किलोमीटर के 'एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन' की सुरक्षा के लिए दर्जनों मानवरहित ड्रोन बोट्स का आर्डर भी दिया है. इसमें हथियारों से लैस इंटरसेप्टर क्राफ्ट भी शामिल हैं. इंडियन नेवी ने अपने बेड़े में 12.7 mm की भारी मशीन गन से लैस अनमैंड सरफेस वेसल्स को शामिल करना शुरू भी कर दिया है.
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नौसेना जिन अनमैंड सरफेस वेसल्स को अपने बेड़े में शामिल करने जा रही है उनकी सबसे बड़ी खासियत इनकी रेंज है. ये मानवरहित ड्रोन बोट्स समुद्र में 550 किलोमीटर का सफर तय कर सकती हैं. इन नावों में 'सेल्फ-राइटिंग' का सुविधा भी है. यानी कि अगर लहरों में फंसकर बोट पलट जाती है तो यह खुद ही वापस सीधी स्थिति में आ सकती है. इन्हें सैटेलाइट की मदद से काफी दूर से कंट्रोल किया जा सकता है. ये नावें झुंड में भी गश्त या हमलावर मिशन को अंजाम दे सकती हैं.
सागर डिफेंस ने ड्रोन बोट के अटैक वर्जन भी विकसित किए हैं जो 300 किलोग्राम का विस्फोटक ले कर जा सकती हैं. इन खास मानवरहित प्लेटफार्म्स के नेवी में शामिल होने से भारत की समुद्री ताकत में कई गुना इजाफा होगा. भारत में 'परशु टैक्टिकल डिफेंस' और लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनियां भी DRDO और अन्य कंपनियों के साथ मिलकर 'अनमैन्ड अंडरवाटर व्हीकल्स' बना रही हैं. माना जा रहा है कि अगले पांच सालों में भारतीय नौसेना के पास इस तरह की चालक रहित नावों का एक बड़ा बेड़ा होगा.