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Delhi Election: 'ऐसे लोगों को चुनाव में नहीं उतारना चाहिए', AIMIM प्रत्याशी ताहिर हुसैन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Supreme Court On Tahir Hussain: सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को लेकर बड़ी टिप्पणी की गई है. कोर्ट ने कहा है कि 'इस तरह के व्यक्तियों को इलेक्शन ही नहीं लड़ने देना चाहिए.' ताहिर हुसैन को दिल्ली विधानसभा चुनावों में AIMIM ने अपना प्रत्याशी बनाया है. आइए जानते हैं पूरी बात.

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Delhi Election: 'ऐसे लोगों को चुनाव में नहीं उतारना चाहिए', AIMIM प्रत्याशी ताहिर हुसैन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

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Delhi Election 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव को लवेकर अब महज कुछ ही दिनों का समय बचा हुआ है. सभी पार्टियां इसको लेकर जोरशोर से तैयारियों में जुटी हुई है. इस चनाव में औवैसी की पार्टी AIMIM की सक्रिय है. उनकी ओर से भी मुस्लिम बहुल सीटों पर प्रत्याशी उतारे जा रहे हैं. इसी कड़ी में AIMIM ने ताहिर हुसैन को उम्मीदवार बनाया है, जिसके बाद ताहिर की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में चुनाव प्रचार के लिए जमानत याचिका दायर की गई है. वहीं सुप्रीम कोर्ट की ओर से ताहिर हुसैन के संदर्भ में बड़ी टिप्पणी आई है. कोर्ट ने कहा है कि 'इस तरह के व्यक्तियों को इलेक्शन ही नहीं लड़ने देना चाहिए.' आपको बताते चलें कि ताहिर हुसैन के ऊपर दिल्ली में दंगे कराने का आरोप है. ओवैसी की पार्टी की टिकट पर वे मुस्तफाबाद विधानसभा सीट पर मैदान में उतरे हुए हैं. इस सीट से उन्होंने अपना नामांकन भरा है.

सुप्रीम कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मजलिस के प्रत्याशी ताहिर हुसैन की अंतरिम जमानत याचिका को लेकर कड़ी टिप्पणी की गई है. ये टिप्पणी कोर्ट की ओर से सोमवार को आई है. ताहिर दिल्ली में हुए दंगों के आरोपी हैं. सुप्रीम कोर्ट की ओर से जमानत याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि इस तरह के सभी प्रत्याशियों को इलेक्शन लड़ने से रोका जाना चाहिए, जो कारावास में हैं. जस्टिस पंकज मित्तल की तरफ से ये टिप्पणी आई है, उन्होंने कहा कि कारावास में रहकर इलेक्शन में विजयी होना आसान है. असल में इस तरह के सारे ही शख्स को अयोग्य घोषित होना चाहिए.'

हाईकोर्ट ने भी नहीं दी थी जमानत
ताहिर हुसैन की ओर से चुनाव प्रचार के लिए हाईकोर्ट में भी अंतरिम जमानत याचिका दायर की गई थी. उस वक्त भी जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने ताहिर को जमानत देने से मना कर दिया था. ताहिर की ओर से 14 जनवरी से 9 फरवरी के बीच चुनाव के मद्देनजर अंतरिम जमानत की मांग की गई थी. उस वक्त कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि दिल्ली के दंगों में ताहिर पर लगे इल्जाम संगीन हैं, इसकी गंभीरता को अनदेखा नहीं कर सकते हैं.

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