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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर अक्षरधाम के पास रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से जल्द ही राहत मिलने वाली है. सराय काले खां से यूपी बॉर्डर के बीच वेरिएबल स्पीड लिमिट पायलट प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा है.
अगर आपने शाम के वक्त दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर कभी गाड़ी चलाई है, तो वह झल्लाहट जरूर महसूस की होगी. एक पल आप तेज रफ्तार से सुकून से गाड़ी भगा रहे होते हैं, और अचानक अक्षरधाम के पास पहुंचते ही ब्रेक पर जोर से पैर दबाना पड़ता है. देखते ही देखते गाड़ियों का लंबा जाम लग जाता है और सफर स्टॉप-एंड-गो बन जाता है.
अक्सर हमें लगता है कि ऐसे जाम से निपटने का एकमात्र तरीका सड़कें चौड़ी करना या नई लेन बनाना है. लेकिन अब वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका हल चौड़ी सड़कों में नहीं, बल्कि गाड़ियों की रफ्तार को सही समय पर थोड़ा धीमा करने में छिपा है.
इसी सोच के साथ, 15 अगस्त के आसपास सराय काले खां से उत्तर प्रदेश बॉर्डर के बीच 8.7 किलोमीटर लंबे हिस्से पर भारत का पहला वेरिएबल स्पीड लिमिट ट्रायल शुरू होने जा रहा है. यह एक ऐसी आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट तकनीक है जो अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे विकसित देशों में पहले से इस्तेमाल की जा रही है.
सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है कि गाड़ी धीमी चलाने से आप मंजिल पर जल्दी कैसे पहुंचेंगे? दरअसल, अभी होता यह है कि ड्राइवर जाम वाले प्वाइंट तक तेजी से भागते हैं और फिर अचानक सब एक साथ ब्रेक लगाते हैं. इससे पीछे तक एक शॉकवेव बनती है और भयानक जाम लग जाता है.
वेरिएबल स्पीड लिमिट सिस्टम में सड़क पर लगे इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल बोर्ड ट्रैफिक का दबाव देखते ही पहले से ही गाड़ियों की स्पीड लिमिट थोड़ी कम कर देंगे. इससे गाड़ियां बिना रुके एक समान रफ्तार से चलती रहेंगी और अचानक लगने वाले जाम से बचाव होगा.
इसे आप स्टेडियम से निकलने वाली भीड़ के उदाहरण से समझ सकते हैं. अगर हजारों लोग एक साथ गेट की तरफ दौड़ेंगे तो दरवाजे पर भगदड़ और जाम लग जाएगा. लेकिन अगर लोगों को थोड़ा धीमा करके रुक-रुक कर गेट की तरफ भेजा जाए, तो हर कोई बिना किसी रुकावट के आराम से बाहर निकल जाएगा. गाड़ियों का गणित भी बिल्कुल ऐसा ही है.
इस पायलट प्रोजेक्ट को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के फंड से तैयार किया गया है. इसे IIT रुड़की के प्रोफेसर सतीश चंद्र और CSIR-CRRI के डायरेक्टर डॉक्टर चालुमुरि रवि शेखर की देखरेख में पूरा किया जा रहा है.
अभी एक्सप्रेसवे के इस हिस्से पर कारों के लिए 70 किमी प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 50 किमी प्रति घंटा की एक ही फिक्स्ड स्पीड लिमिट है, चाहे सड़क खाली हो या जाम. लेकिन नए सिस्टम में सेंसर और कैमरे रियल-टाइम ट्रैफिक को भांपेंगे और उसके हिसाब से डिजिटल बोर्ड पर स्पीड बदलती रहेगी.
दिन के अलग-अलग समय के हिसाब से रफ्तार की नई सीमाएं तय की गई हैं-
इस योजना को हवा में नहीं बनाया गया है. जुलाई 2024 में अक्षरधाम के पास 72 घंटे तक लगातार ट्रैफिक की वीडियो फुटेज जुटाकर रिसर्च की गई. स्टडी में पाया गया कि इस रास्ते पर 80% से ज्यादा गाड़ियां कारें होती हैं, जबकि 4 से 12% हिस्सेदारी भारी वाहनों की है. शाम के समय ऑफिस छूटने के बाद ट्रैफिक चरम पर होता है.
हां, यह सिर्फ एक प्रयोग नहीं है. अक्षरधाम इंटरचेंज के पास दोनों दिशाओं में डिजिटल बोर्ड लगाए जाएंगे. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को कहा गया है कि वे इन बोर्ड पर दिख रही नई स्पीड लिमिट के हिसाब से ही ओवरस्पीडिंग का चालान काटें.
शोधकर्ता 30, 90 और 120 दिनों के अंतराल पर इस पायलट प्रोजेक्ट के आंकड़ों की समीक्षा करेंगे. अगर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले दिनों में इसे पूरे एक्सप्रेसवे और देश के अन्य बड़े एक्सप्रेसवे पर भी लागू किया जा सकता है.
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