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Sonam Wangchuk Health Update: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 19 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत पर दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है.
Sonam Wangchuk Protest News: अनशन पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र को सख्त निर्देश दिया है. कोर्ट ने गुरुवार (16 जुलाई 2026) को केंद्र सरकार से कहा कि वह सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत का पूरा ध्यान रखे. वांगचुक पिछले 19 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं. वह शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हैं.
गुरुवार सुबह सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा, "सोनम वांगचुक की जान बचाने के लिए जो भी जरूरी मेडिकल कदम उठाने पड़ें, सरकार को वो उठाने चाहिए. हमारे देश में हर एक नागरिक की जान बहुत कीमती है, और उसे सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन को अपनी पूरी ताकत लगा देनी चाहिए."
दरअसल, बुधवार को कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि अगर 59 साल के वांगचुक ने अगले 48 घंटों में अपना अनशन नहीं तोड़ा, तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है. इस याचिका में सरकार पर मामले को लेकर संवेदनहीन और लापरवाह होने का आरोप भी लगाया गया था.
याचिका के मुताबिक, भूख हड़ताल की वजह से सोनम वांगचुक का वजन करीब 8.5 किलो तक गिर चुका है. कोर्ट से गुहार लगाते हुए कहा गया कि इस स्थिति में सबसे सीधा रास्ता यह है कि उन्हें तुरंत किसी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाए और लिक्विड डाइट के जरिए उनके शरीर में जरूरी पोषक तत्व, विटामिन और मिनरल्स पहुंचाए जाएं, ताकि उनकी जान बचाई जा सके.
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अगर इस दौरान वांगचुक को कुछ हो जाता है, तो यह पूरे देश और दुनिया के सामने भारत के लिए बेहद शर्मिंदगी वाली बात होगी. सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी तीखे सवाल किए.
कोर्ट ने पूछा कि वांगचुक की सेहत की निगरानी के लिए अब तक कोई पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए? इस पर सरकारी वकील ने दलील दी कि वांगचुक का रोजाना चेकअप किया जा रहा है, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि जांच करने वाले डॉक्टर हमेशा सरकारी अस्पतालों के नहीं होते और कभी-कभी प्राइवेट डॉक्टरों से भी मदद ली जा रही है.
इस जवाब पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "हम चाहते हैं कि सरकारी डॉक्टरों की एक टीम रोजाना उनकी सेहत की जांच करे और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही आगे का फैसला लिया जाए. अगर उन्हें किसी भी तरह की दवा या इलाज की जरूरत है, तो प्रशासन तुरंत दखल दे. हर एक जिंदगी हमारे लिए अनमोल है."
इस अदालती आदेश से ठीक कुछ घंटे पहले, सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो संदेश जारी किया था. उन्होंने कहा कि 19 दिनों के अनशन के हिसाब से उनकी हालत अभी सामान्य है. कई बड़े राजनेताओं द्वारा अनशन तोड़ने की भावुक अपीलों के बावजूद, उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक सरकार की तरफ से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आती, वह पीछे नहीं हटेंगे. उनका मानना है कि बिना किसी नतीजे के अनशन खत्म करने से समाज में गलत संदेश जाएगा.
वांगचुक ने वीडियो में कहा, "मेरी हालत इतनी भी बुरी नहीं है कि मैं चल-फिर न सकूं. हां, शरीर में कमजोरी जरूर है और मांसपेशियां थक रही हैं, लेकिन मेरा दिल और हौसला पूरी तरह मजबूत है. इसलिए मुझसे अनशन तोड़ने के लिए कहने के बजाय, आप सब मेरा साथ दें. 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले CJP के प्रदर्शन में भारी संख्या में जुटें, ताकि सरकार तक हमारी आवाज पहुंच सके."
उन्होंने आगे अपील की कि स्कूल और कॉलेज के छात्र भी इस मुहिम का हिस्सा बनें. वांगचुक ने कहा, "हम सब मिलकर इस मुद्दे को संसद सदस्यों के सामने रखेंगे और जब यह मामला सही हाथों में पहुंच जाएगा, तभी मैं अपना अनशन खत्म करूंगा." अभिजीत दिपके की अगुवाई वाली कॉकरोच जनता पार्टी लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग कर रही है. यह पूरा विवाद नीट-यूजी जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने के बाद शुरू हुआ है, जिसके विरोध में छात्र और सामाजिक संगठन सड़कों पर हैं.
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