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दिल्ली सरकार के अधिकारियों का दावा है कि अगले 45 दिनों में ड्राफ्ट बिल तैयार किया जा सकता है. इसके तैयार होने के बाद दिल्ली की सीएम और उपराज्यपाल के समक्ष रखकर चर्चा की जाएगी. कैबिनेट से लेकर स्टेकहोल्डर्स से विचार विमर्श के बाद पॉलिसी को लागू किया जाएगा.
देश की राजधानी दिल्ली में स्थित सत्य निकेतन पीजी की बिल्डिंग गिरने से 7 छात्रों की जान चली गई.इसके बाद से दिल्ली सरकार एक्शन में आ गई है. वहीं इस हादसे ने प्राइवेट पीजी और किराये के कमरों पर निर्भर हजारों छात्रों के लिए सुरक्षा, बुनियादी सुविधाओं और जवाबदेही से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिये हैं. इसी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने PG अकोमोडेशन को रेगुलेट करने के लिए ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार कर ली है. इसमें पीजी से लेकर किराये पर बिल्डिंग देने वालों के लिए कई नियम और रजिस्ट्रेशन से लेकर सुरक्षा मानक शामिल किये गये हैं.सरकार के मानकों पर खरा उतरने के बाद ही पीजी संचालन के लिए लाइसेंस जारी किया जाएगा.
घटना के बाद दिल्ली सरकार के शहरी विकास मंत्री आशीदष सूद ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा और रहने की व्यवस्था पर खास ध्यान दिया जाएगा. इसके लिए जल्द ही पीजी को रेगुलेट करने के लिए पॉलिसी बनाई जाएगी, जिस पर पिछले कुछ समय से काम चल रहा है, लेकिन सत्य निकेतन की इमरात गिरने से हुए हादसे के बाद इसे और तेज कर दिया गया है. इसमें PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जाएगा.
दिल्ली सरकार द्वारा तैयार किये जा रहे है रेगुलेट पॉलिसी में पीजी संचालकों को पीजी ऑपरेटिंग लाइसेंस हासिल करना होगा. उन्हें एमसीडी से सत्यापन कराना होगा. इसके साथ ही हर रजिस्टर्ड संपत्ति को एक रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाएगा. इस सत्यापित लिस्ट को डिजिटल प्लेटफॉर्म GovPG पर वेरिफाइड पीजी को लिस्ट करेगा और कब्जा, किराये में बदलाव, जांच की तारीख और नियमों के पालन से जुड़ी जानकारी देगा. इसके साथ ही इस पर पीजी में रहने वाले छात्र शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे. उनके नाम और पूरी जानकारी को गुप्त रखा जाएगा.
पीजी के नाम पर चल रहे छोटे-छोटे पिंजरेनुमा कमरे और सुरक्षा के नाम पर शून्य इंतजाम अब अतीत की बात होने वाले हैं. सरकार की नई रूपरेखा के अनुसार, हर पीजी संचालक को पुलिस और एमसीडी से वेरिफिकेशन कराना होगा. पीजी के एंट्री गेट और कॉमन एरिया में सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे, जिनकी 30 दिन की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखनी होगी. जिन पीजी में 15 या उससे ज्यादा छात्र रहते हैं, वहां रात के समय 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाइसेंसधारी नाइट गार्ड रखना अनिवार्य होगा.
इसके अलावा, आपात स्थिति के लिए 15 मिनट के भीतर पहुंचने वाला वार्डन भी परिसर के पास होना जरूरी किया जा रहा है.
- मकान मालिक आपकी मजबूरी का फायदा उठाकर कभी भी किराया बढ़ा देते हैं, लेकिन नये प्रस्ताव के तहत सरकार एक 'रेंट रेगुलेशन कमेटी' बनाने जा रही है, जो इलाके के हिसाब से किराये के दायरे (रेंट बैंड) तय करेगी. अब इलाकों की लोकेशन, वहां मिलने वाली सुविधाओं और मेट्रो या कॉलेज की दूरी के आधार पर ही किराया तय होगा.
- मकान मालिक या पीजी मालिक एडवांस या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर छात्रों से मनमाना पैसा नहीं वसूल सकेंगे. इसके साथ ही जमा डिपॉजिट वापस करने के लिए भी 30 दिन का नियम अनिवार्य होगा.
दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने स्टूडेंट्स से मिलकर उनकी समस्याएं समझी. उन्होंने कहा कि मैंने अलग अलग कॉलेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को बुलाया, ताकि उनसे बात कर उनकी समस्याओं को समझ सकूं. उन्हें कैसी और किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इसमें मुझे पता चला कि किराया, मिलने वाली सुविधाएं, साइन करने के लिए कहे जाने वाले एग्रीमेंट, उन एग्रीमेंट का पालन, जवाबदेही और अपनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दे कई मुद्दे हैं. वहीं बिजली की यूनिट को लेकर भी पीजी और मकान मालिक छात्रों से 24 रुपये यूनिट की वसूली करते हैं. हम उनकी सुरक्षा से लेकर बिजली, पानी और दूसरी सुविधाओं को रेगुलेट नियमों में शामिल करेंगे.
सरकार द्वारा तैयार किये जा रहे ड्राफ्ट में इंस्टीट्यूशन अकोमोडेशन कमेटी बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है, जिसमें कॉलेज के अधिकारियों से लेकर नगर पालिका प्रतिनिधि, छात्र प्रतिनिधि और उस क्षेत्र के लोकल पुलिस अधिकारी शामिल होंगे. वहीं यह कमेटी हर 3 महीनें में सरकार के बनाये नियमों के पालन होने या न होने की जांच करेगी. नियमों कर उल्लंघन करने वाले पीजी मालिकों को नोटिस जारी करेगी. वहीं यह कमेटी पीजी और संचालकों में अक्सर सामने आने वाले विवादों को सुलझाने में भी मदद करेगी.
दिल्ली सरकार कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों को पीजी और किराये के कमरों से छुटकारा दिलाने के लिए उन्हें से ज्यादा से ज्यादा हॉस्टल देने की कोशिश करेगी. मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सरकार छात्रों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए हॉस्टल की संख्या बढ़ाने को तैयार कर रही है. इसके अलावा भी सरकार कुछ ऐसे सॉल्यूशन तलाश रही है, जिससे छात्रों की समस्याएं दूर हो जाये.