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Delhi Exit Poll: एग्जिट पोल से अलग BJP के लिए दिल्ली जीतना आसान नहीं, ये 4 हैं बड़े कारण 

Delhi Exit Poll 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव में ज्यादातर एग्जिट पोल में बीजेपी को बढ़त दिखाई गई है. हालांकि, इसके बाद भी माना जा रहा है कि AAP को सत्ता से बेदखल करना बीजेपी के लिए आसान नहीं है. 

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Delhi Exit Poll: एग्जिट पोल से अलग BJP के लिए दिल्ली जीतना आसान नहीं, ये 4 हैं बड़े कारण 

दिल्ली में बीजेपी की राह क्यों है मुश्किल?

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दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election 2025) के नतीजे शनिवार, 8 परवरी को आने वाले हैं. इससे पहले ज्यादातर एग्जिट पोल में बीजेपी (BJP) की सत्ता में वापसी का अनुमान जताया गया है. इस बार के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने आप सरकार की शराब नीति और भ्रष्टाचार के मामले को जोरदार ढंग से उठाया था. पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत पार्टी के दिग्गज नेताओं ने दिल्ली में चुनाव प्रचार भी किया है. एग्जिट पोल में बढ़त के अनुमान के बाद भी बीजेपी के लिए दिल्ली में सत्ता की चाबी पाना आसान नहीं है.

AAP सरकार के लाभार्थियों का बड़ा वर्ग 
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की चलाई जनकल्याणकारी योजनाओं का फायदा उठानेवालों का एक बड़ा वर्ग है. इसमें बसों में महिलाओं की फ्री यात्रा, फ्री बिजली-पानी से लेकर महिलाओं के खाते में 2100 रुपये ट्रांसफर के ऐलान जैसी योजनाएं शामिल हैं. लाभार्थियों के इस बड़े वर्ग को अपने पक्ष में जोड़ना बीजेपी के लिए आसान नहीं है.


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मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं होना 
दिल्ली में बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा है जबकि आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव जीतने के बाद सीएम अरविंद केजरीवाल ही बनेंगे. मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं होने से मतदाताओं के बीच असमंजस की स्थिति है.  

दिल्ली में फेल होते रहे हैं एग्जिट पोल 
दिल्ली में एग्जिट पोल फेल होते रहे हैं. 2013 के चुनाव में बीजेपी को प्रचंड बहुमत दिया गया था, लेकिन पार्टी बहुमत  से 4 सीटें दूर रह गई थी. उस वक्त कांग्रेस के समर्थन से अरविंद केजरीवाल सीएम बने थे. 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को ज्यादातर एग्जिट पोल में बहुमत मिलता दिखाया गया था, लेकिन अधिकतम 53 सीटें ही दी गई थीं. हालांकि, उस बार पार्टी ने 67 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया था. 


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20 सीटों पर बीजेपी की हालत खस्ता रही है 
दिल्ली विधानसभा में कुल 12 ऐसी सीटें हैं जहां दलितों का दबदबा है और दूसरी ओर 8 सीटें मुस्लिम बहुल आबादी वाली हैं. इन 20 सीटों पर पिछले 3 दशक में बीजेपी का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है. सत्ता की चाबी पाने के लिए इन 20 सीटों पर समीकरण अपने पक्ष में करना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है.

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