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स्वतंत्र के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ 23 जून को एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके बाद 27 जून को पूछताछ के लिए उसको पेश होने का नोटिस जारी किया गया था.
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान मारपीट के मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत गिरफ्तार हुए स्वतंत्र भारद्वाज की जमानत याचिका पर दिल्ली की कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट 15 सितंबर यानी मंगलवार को इस पर फैसला सुनाएगा. सोमवार को सुनवाई के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल को कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद गिरफ्तार किया गया था, जबकि शिकायतकर्ता ने ही उस पर हमला किया था.
स्वतंत्र भारद्वाज को सात सितंबर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि जंतर-मंतर पर सीजेपी आंदोलन के दौरान उसने एक दलित सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के पिता पर हमला किया. उसको तब गिरफ्तार किया गया, जब यूट्यूब पर उसके एक इंटरव्यू के वीडियो ने आक्रोश पैदा कर दिया, जिसमें भारद्वाज ने दावा किया था कि उसने 23 जून के प्रदर्शन के दौरान एक दलित छात्र कार्यकर्ता के पिता की खोपड़ी फोड़ दी थी और अपने राजनीतिक संबंधों के कारण गिरफ्तारी से बच गया था.
सोमवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललर ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि क्या घटना के समय स्वतंत्र भारद्वाज ने जातिसूचक गाली दी थी. इस पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि जब शुरुआत में शिकायत दर्ज की गई थी, तब उसमें जातिसूचक गाली का कोई जिक्र नहीं था. बाद में जब दोबारा बयान दर्ज किया गया, तो उसमें जातिसूचक गाली का उल्लेख किया गया और इसी के आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम लगाया गया.
स्वतंत्र के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ 23 जून को एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके बाद 27 जून को पूछताछ के लिए उसको पेश होने का नोटिस जारी किया गया था. वकील ने अपने मुवक्किल के हवाले से कहा, 'मैं 29 जून को पूछताछ के लिए पेश हुआ. इसके बाद मुझे जाने दिया गया. फिर कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद 4 सितंबर को मुझे गिरफ्तार कर लिया गया. मेरी गिरफ्तारी के बाद (पॉक्सो अधिनियम के तहत) एक नई प्राथमिकी दर्ज की गई.'
उन्होंने कहा, 'सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान शिकायतकर्ता ने खुद मुझ पर हमला किया था. उसका वीडियो सोशल मीडिया पर उपलब्ध है. वीडियो में साफ दिख रहा है कि मैं गिर गया था और पुलिस ने मुझे बचाया था.' उन्होंने कहा, 'पुलिस को वह वीडियो नजर नहीं आ रहा, जिसमें साफ दिख रहा है कि शिकायतकर्ता ने मुझ पर हमला किया और मैं गिर गया.' इसके बाद अदालत ने वीडियो क्लिप चलाकर देखा.
शिकायतकर्ता के वकील ने इसके बाद कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी में कोई कानूनी खामी नहीं थी और आरोपी के खिलाफ एससी/एसटी अधिनियम और बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई हैं. दलीलें सुनने के बाद जस्टिस ललर ने कहा कि आगे की कार्यवाही बंद कमरे में होगी और फिर अदालत के कर्मचारियों ने मीडिया कर्मियों से अदालत कक्ष से बाहर जाने को कहा. बाद में अदालत के कर्मचारियों ने बताया कि आदेश सुरक्षित रख लिया गया है और इसे मंगलवार को सुनाया जाएगा.
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