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दिल्ली के 'मनहूस' CM बंगले का होगा रेनोवेशन, आखिर क्यों इसमें रहने से डरते थे नेता, जानिए क्या है इसके शापित होने की कहानी

दिल्ली सीएम के लिए अलॉट हुए सिविल लाइंस के शामनाथ मार्ग स्थित बंगला नंबर 33 को अब डीडीएमए को सौंप दिया गया है. अब यहां पर डीडीएमए का कार्यालय बनाया जाएगा. साथ ही इस बंगले पर लगा मनहूस सीएम बंगले का नाम भी हट जाएगा. आइए जानते हैं क्या है इसकी पूरी कहानी... 

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दिल्ली के 'मनहूस' CM बंगले का होगा रेनोवेशन, आखिर क्यों इसमें रहने से डरते थे नेता, जानिए क्या है इसके शापित होने की कहानी

delhi cm residence history

(Credit Image Social Media)

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.दिल्ली सिविल लाइंस में सीएम बंगले को डीडीएमए को अलॉट किया गया है
.सिविल लाइंस स्थित शामनाथ मार्ग बंगला 33 को मनहूस माना जाता था
.यहां रहने आये दिल्ली के सीएम का कार्याकाल पूरा नहीं हो सका
.बंगले की बिल्डिंग को रेनोवेट कर अब नये नाम से जाना जाएगा

देश की राजधानी दिल्ली में सिविल लाइंस बेहद महंगे और पॉश एरिया में शामिल है. यहां बने बंगले किसी महल से कम नहीं हैं. ज्यादातर लोगों का सपना होता है कि उनका एक बंगला हो, लेकिन दिल्ली के सिविल लाइंस स्थित शामनाथ मार्ग पर बंगला नंबर 33 सालों से खाली पड़ है. इसकी वजह राजनीति से जुड़े लोगों का इसे मनहूस माना जाना है. यह बंगला दिल्ली का सीएम हाउस हुआ करता था, लेकिन जो भी इसमें रहा उससे विवादों से लेकर समय से पहले अपनी गद्दी छोड़नी पड़ी. इतना ही नहीं लोग टॉप से डाउन पर पहुंच गये. इसी को देखते हुए ज्यादातर राजनेताओं से इस बंगले से दूरी बना ली. खाली पड़ी इस बिल्डिंग को अब नया नाम दे दिया गया है. इसका रेनोवेशन किया जा रहा है. आइए जानते हैं कि आखिर क्या हैं शामनार्थ मार्ग स्थित बंगला नंबर 33 की कहानी...

सालों से खाली पड़ा है ये बंगला डीडीएमए को किया गया अलॉट

कभी दिल्ली के सीएम के रूप में अपनी पहचान बनाने वाला शामनाथ मार्ग स्थित बंगला नंबर 33 पर मनहूस होने का कलंक लग गया. राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा हुई और इसमें रहने वाला कोई नहीं मिला. इसी को देखते हुए सरकार ने अब इस बंगले को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) को सौंप दिया गया है. इसका रेनोवेट कर बिल्डिंग में डीडीएमए का मुख्यालय बनाया जाएगा. इसका रेनोवेशन के मौके पर इस बंगले का इतिहास और इससे जुड़ी कहानियां आपको हैरान कर देंगी, आइए जानते हैं...

5500 वर्ग मीटर में फैला ये बंगला

मनहूस का टैग पा चुका यह बंगला सिविल लाइंस के हरे-भरे इलाके में स्थित, दो मंजिला बना है. इस बंगले में करीब 5,500 वर्ग मीटर का एरिया है. ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1920 के दशक में इसे बनाया गया था, जिसमें बड़ा सा लॉन, कई सम्मेलन कक्ष, कर्मचारियों के लिए अलग से क्वार्टर और लंबा चौड़ा बीमचा बना हुआ है. देश आजाद होन के बाद विधानसभा पास होने की वजह से यह बंगला दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश को आवास के रूप में सौंपा गया. वे 1952 में इसमें रहने आये, लेकिन उनका कार्याकाल समय पहले ही खत्म हो गया था. 

इसमें रहने वाले सीएम पूरा नहीं कर पाये अपना कार्यकाल

यह बंगला सबसे पहले दिल्ली के पहले सीएम चौधरी ब्रह्म प्रकाश को सौंपा गया. वे सीएम बनने के बाद 1952 में इसमें रहने आये, लेकिन कुछ समय बाद ही उन्होंने 'गुड़ घोटाले' में अपनी कुर्सी खो दी. 3 साल यानी 1955 में उनका कार्यकाल समय से पहले ही खत्म हो गया. लगभग चार दशक बाद, नवगठित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के ढांचे के तहत 1993 में मुख्यमंत्री बनने पर यह बंगला मदन लाल खुराना को आवंटित किया गया था, उनके साथ ही भी कुछ ऐसा ही हुआ. उन्हें मात्र 3 साल में कार्यकाल अधूरा छोड़कर सीएम की कुर्सी से उतरना पड़ा. इसके बाद इस घर के बारे में चर्चा शुरू हो गई. 

कार्यकाल बनाने पर भी पूरा नहीं हुआ कार्यकाल

दो मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल पूरा न कर पाने की वजह से राजनीतिक गलियारे में इस बंगले को लेकर मनहूस और अपशगुन जैसी बातें फैल गई. इसके चलते मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा ने इस बंगले को सीएम कार्यालय बना दिया, लेकिन मात्र 3 साल में उन्हें कुर्सी छोड़नी पड़ी.वो भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाये. वर्मा के बाद सुषमा स्वराज ने सीएम पथ की शपथ ली. उन्होंने इसमें आवास बनाया, लेकिन मात्र 3 साल में उन्हें भी यह छोड़ना पड़ना. 2003 में दिल्ली सरकार में तत्कालीन मंत्री दीप चंद बंधु ने सहयोगियों और शुभचिंतकों की सलाह के बावजूद उस बंगले में रहना शुरू कर दिया. इसके कुछ ही दिन बाद, उन्हें मेनिन्जाइटिस हो गया और बाद में अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई, जिससे संपत्ति की अशुभ प्रतिष्ठा और भी मजबूत हो गई.

शीला दीक्षित ने इस बंगले को रहने के लिए नहीं चुना

इस बंगले में रहने वाले ज्यादातर सीएम को राजनीति असफलता और कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. घर में कमी की खबर राजनीतिक गलियारे में आग की तरह फैल गई. इसी क बाद शीला दीक्षित ने दिल्ली में सीएम बनने के बाद आवास या कार्यालय के रूप में इस बंगले को नहीं चुना. इसी के बाद से यह बंगला मनहूस माना जाने लगा. इसके बाद यह दो दशक तक खाली पड़ा रहा. 

डीडीएम को सौंपा गया बंगला, रेनोवेशन का काम शुरू

अब शामनाथ मार्ग पर स्थित बंगला नंबर 33 को डीडीएमए को सौंप दिया गया है. यहां पर डीडीएमए का कार्यालय बनाया जाएगा. इसके लिए बिल्डिंग का रेनोवेशन शुरू हो गया है. जल्द ही अब इस बिल्डिंग का नाम अब सीएम हाउस से बदलकर आपदा संबंधी एजेंसी डीडीएमए के नाम हो जाएगा. साथ ही इस बिल्डिंग पर मनहूस का टैग हट जाएगा.

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