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ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान दिल्ली के ऑटो और टैक्सी चालकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है.
दिल्ली में ऑटो-कैब का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए बुरी खबर है. पेट्रोल-डीजल-सीएनजी की लगातार बढ़ती कीमतों के विरोध में दिल्ली के ऑटो और टैक्सी चालकों ने हड़ताल का ऐलान किया है. अपनी मांगों को मनवाने के लिए दिल्ली की ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने 21 मई से 23 मई, 2026 तक तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल करेंगे.
यूनियनों का कहना है कि सीएनजी, पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी के कारण चालकों के लिए अब परिवार चलाना मुश्किल हो गया है, इसलिए किराये में बढ़ोतरी करना बेहद जरूरी है. इस सिलसिले में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने सोमवार (18 मई 2026) को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को एक पत्र लिखकर अपनी मांगों से अवगत कराया है.
चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने हड़ताल की घोषणा करते हुए कहा, "सीएनजी और अन्य ईंधनों की लगातार बढ़ती कीमतों ने मध्यम वर्गीय ड्राइवरों की कमर तोड़ दी है. वे अपने परिवारों का भरण-पोषण करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली के अन्य संगठनों के साथ मिलकर चालक शक्ति यूनियन ने 21, 22 और 23 मई को चक्का जाम का आह्वान किया है. हमने सभी चालकों से अपील की है कि वे इन तीन दिनों में अपने वाहनों का संचालन न करें."
यूनियन ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि अगले एक या दो सप्ताह के भीतर टैक्सी और ऑटो के किराये में बढ़ोतरी नहीं की गई और इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई, तो इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा और इसे एक बड़े पैमाने के राष्ट्रव्यापी विरोध में बदल दिया जाएगा.
यूनियन ने अपने पत्र में इस बात का भी जिक्र किया है कि वे पिछले साल इस मुद्दे को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय गए थे. अदालत ने तब सरकार को निर्देश दिया था कि टैक्सी चालकों की समस्याओं का समाधान किया जाए और किराये में उचित वृद्धि की जाए. हालांकि, यूनियनों का आरोप है कि दिल्ली सरकार इस मामले को लगातार लटका रही है. सरकार का कहना है कि किराये की फाइल को मंजूरी के लिए उपराज्यपाल के पास भेजा गया है, जिससे इस प्रक्रिया में देरी हो रही है.
हड़ताल पर जा रहे चालकों ने ओला और उबर जैसी ऐप-आधारित कैब कंपनियों के खिलाफ भी गंभीर चिंता जताई है. ड्राइवरों का आरोप है कि ये कंपनियां लगातार कीमतें बढ़ाकर मनमानी कर रही हैं, जबकि जमीन पर काम करने वाले दिल्ली के टैक्सी चालकों को आर्थिक शोषण और गुलामी जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है.
यूनियनों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से टैक्सी के किराये में कोई संशोधन या बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि इसी अवधि में सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू चुकी हैं. ऐसे में पुराने किराये पर काम करना अब मुनाफे का सौदा नहीं रह गया है.
इस विरोध प्रदर्शन को व्यापक समर्थन मिल रहा है. पिछले हफ्ते ही दिल्ली ऑटो रिक्शा यूनियन और दिल्ली प्रदेश टैक्सी यूनियन ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर किराये में बढ़ोतरी की मांग उठाई थी. चालकों का कहना है कि अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए वे हड़ताल के आखिरी दिन यानी 23 मई को दिल्ली सचिवालय के बाहर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन भी करेंगे.