भारत
दिवाली से पहले ग्रीन पटाखों की बिक्री से बाजारों में रौनक लौट आई है, लेकिन दिल्ली-एनसीआर की हवा लगातार खराब हो रही है. बढ़ते AQI के बीच ग्रैप-2 लागू कर सख्ती बढ़ाई गई है.
दिल्ली-एनसीआर में दिवाली से पहले ग्रीन पटाखों की बिक्री शुरू हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इस साल भी प्रमाणित पर्यावरण-अनुकूल पटाखों के इस्तेमाल की इजाजत दी है. आदेश के बाद पटाखों की दुकानों के बाहर लंबी लाइनें दिखने लगी हैं. दुकानदारों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार ग्राहकों की संख्या काफी बढ़ी है और खासकर परिवार ग्रीन पटाखों की ओर रुख कर रहे हैं. लेकिन पटाखों की खरीदारी के बीच राजधानी की हवा लगातार खराब होती जा रही है.
दिवाली से ठीक पहले रविवार को दिल्ली का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) 296 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है और ‘बहुत खराब’ के बेहद करीब है. कई इलाकों में स्थिति और खराब हो गई है. आनंद विहार में AQI 430 पहुंच गया, जबकि वजीरपुर, विवेक विहार और द्वारका में भी हवा की हालत ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई.
वहीं एनसीआर के शहरों में हालात और गंभीर बने हुए हैं. गाजियाबाद में लगातार तीसरे दिन हवा ‘बहुत खराब’ की कैटेगरी में रही और 24 घंटे का औसत AQI 324 दर्ज किया गया. प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए इलाके में ग्रैप-2 (GRAP-II) लागू कर दिया गया है. इसका मतलब है कि अब निर्माण धूल, वाहनों की जांच और खुले में जलने वाली चीजों पर सख्त निगरानी की जाएगी. लोकल सर्किल्स के एक सर्वे के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस बार पटाखे जलाने वाले परिवारों की संख्या 40% तक बढ़ सकती है. सर्वे में यह भी सामने आया है कि 34% परिवार इस बार पटाखे जलाएंगे और उनमें से कई सामान्य पटाखों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि ग्रीन पटाखे भी हवा खराब होने पर सेहत के लिए खतरा बन सकते हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए.
सुरक्षा को देखते हुए कोर्ट ने साफ किया है कि वही पटाखे बेचे जाएंगे जिन्हें NEERI और PESO से मंजूरी मिली हो और उन पर QR code होना जरूरी है. दिल्ली पुलिस ने फर्जी पटाखों पर रोक के लिए निगरानी बढ़ा दी है.
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