भारत
शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के लिए भाजपा की प्राथमिकता सूची जारी की है. इसमें महिला सुरक्षा, 1 करोड़ रोजगार, कर्मचारियों को 7वां वेतन आयोग/DA, समान नागरिक संहिता और भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'श्वेत पत्र' जैसे बड़े वादे शामिल हैं.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदलाव का दावा करते हुए भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने पार्टी के आगामी रोडमैप की घोषणा की है. अप्रैल 2026 में जारी भाजपा के पश्चिम बंगाल घोषणापत्र के अनुसार, सरकार बनने पर पहले 45-200 दिनों के भीतर प्रमुख वादे लागू किए जाएंगे. भाजपा की सरकार बनते ही किन वादों को सबसे पहले प्राथमिकता दी जाएगी, आगे हम आपको बताएंगे. दरअसल, यह संकल्प पत्र सुरक्षा, रोजगार और महिला सशक्तिकरण के इर्द-गिर्द बुना गया है.
भाजपा की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर टीएमसी शासन के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और बिगड़ी कानून-व्यवस्था पर एक श्वेत पत्र जारी करना है. इसके साथ ही राज्य में लंबे समय से चली आ रही "सिंडिकेट" और "कट मनी" संस्कृति को पूरी तरह समाप्त करने का वादा किया गया है.
आर्थिक मोर्चे पर पार्टी ने 1 करोड़ नए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा है. इसके अतिरिक्त, चाय बागानों और दार्जिलिंग के चाय उद्योग के पुनरुद्धार के लिए विशेष योजनाओं की बात कही गई है. सरकारी कर्मचारियों के लिए 7th Pay Commission के तहत महंगाई भत्ता (DA) सुनिश्चित करना भी सूची में शामिल है.
महिलाओं के लिए भाजपा ने बड़े वादे किए हैं. महिलाओं की सुरक्षा के लिए Durga Suraksha Squads का गठन और सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण. महिलाओं को 3,000 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता प्रदान करना.
राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घुसपैठ पर कड़ी कार्रवाई करने और राज्य में Uniform Civil Code (UCC) लागू करने का संकल्प लिया गया है. साथ ही, धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए विशेष कानून बनाने की भी घोषणा की गई है.
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मछुआरों का पंजीकरण और सहायता सुनिश्चित की जाएगी. वहीं, चावल, आलू और आम की खेती करने वाले किसानों के लिए Minimum Support Price (MSP) और उचित मूल्य का समर्थन देने का वादा किया गया है.
पार्टी ने Vande Mataram Museum की स्थापना और Ayushman Bharat योजना का विस्तार कर मुफ्त चिकित्सा सहायता देने का वादा किया है. इसके अलावा, राजबंशी और कुर्माली जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने का भी प्रस्ताव है.
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