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क्या कर्नाटक में बदलेगा सीएम? मल्लिकार्जुन खरगे ने हाईकमान की बात कहकर बढ़ाया सस्पेंस

कर्नाटक में सीएम बदलाव की अटकलों के बीच मल्लिकार्जुन खरगे ने नेतृत्व परिवर्तन को हाईकमान पर छोड़कर राजनीतिक सस्पेंस बढ़ा दिया है, जबकि सिद्धारमैया और शिवकुमार ने एकता का संदेश दिया है.

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क्या कर्नाटक में बदलेगा सीएम? मल्लिकार्जुन खरगे ने हाईकमान की बात कहकर बढ़ाया सस्पेंस
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कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है. पिछले कुछ दिनों से मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का ताजा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन को लेकर हाईकमान के फैसले की बात कहकर चर्चाओं को और हवा दे दी है. जिसके बाद राज्य के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला द्वारा विधायकों से वन-टू-वन मुलाकातों के बीच यह बयान आया है, जिसने राज्य की राजनीतिक फिजा को और गरमा दिया है. 

सियासी गलियारों में चर्चा तेज

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का बयान सामने आया है, जिसने इन अटकलों को और गहराई दे दी है. उन्होंने स्पष्ट कहा है कि मुख्यमंत्री के चयन या बदलाव का निर्णय पार्टी हाईकमान ही करेगा और किसी को भी बेवजह भ्रम फैलाने या मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं है. खरगे का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला बेंगलुरु पहुंचकर विधायकों से व्यक्तिगत मुलाकातें कर रहे हैं. इन मुलाकातों को लेकर सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या पार्टी नेतृत्व राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी कर रहा है?

एकजुटता का संदेश देने की कोशिश

वहीं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दोनों ने मैसूर में एक साथ मीडिया के सामने आकर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की. सिद्धारमैया ने दावा किया कि सरकार पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी. उन्होंने मीडिया के सामने शिवकुमार का हाथ उठाकर यह भी दिखाने की कोशिश की कि दोनों के बीच कोई मतभेद नहीं है.


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भविष्य की रणनीति को लेकर सतर्कता

हालांकि, राज्य में सिद्धारमैया का ढाई साल का कार्यकाल नवंबर में पूरा हो जाएगा, जिसे लेकर पहले से ही सत्ता के संतुलन पर अटकलें लगती रही हैं. इसी बीच राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर का बयान भी चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें यह नहीं मालूम कि विधायकों को बातचीत के लिए क्यों बुलाया जा रहा है.  बहरहाल, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व भविष्य की रणनीति को लेकर सतर्कता बरत रहा है और यह बयानबाजी उसी का हिस्सा हो सकती है. 

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