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मध्य प्रदेश की सियासत में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है. राज्य के गठन के साथ ही इसकी भी शुरुआत हो गई थी, लेकिन संविद सरकार के दौरान पहली बार इसका विकृत स्वरूप देखने को मिला था.
मध्य प्रदेश की सियासत में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है. राज्य के गठन के साथ ही इसकी भी शुरुआत हो गई थी, लेकिन संविद सरकार के दौरान पहली बार इसका विकृत स्वरूप देखने को मिला था. 1967 में बनी पहली गैर-कांग्रेसी सरकार राजमाता विजयाराजे सिंधिया के अपमान की ऊपज थी. उसके गठन में वो सारे हथकंडे अपनाए गए जो हमें आज देखने को मिलते हैं. विधायकों के पालाबदल के लिए पद और पैसे का लालच, 5-स्टार होटलों में विधायकों की बाड़ेबंदी, खुलेआम खरीद-फरोख्त- एमपी में ये सब कुछ तब हुआ जब दूसरे राज्यों में ऐसे मामले कम ही देखने को मिलते थे. दलबदल के बूते बनी इस सरकार में लेन-देन एक सरकारी नियम जैसा बन गया था. राज्य के मंत्रियों पर भी रिश्वतखोरी के आरोप लगे थे. और तो और, एक बार तो मुख्यमंत्री ने ही एक प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए फाइल पर लिख दिया था कि उनके मंत्री ने घूस लिया है, वो भी चेक से.
सिंचाई विभाग का मामला
ये मामला सिंचाई विभाग का था. तब बृजलाल वर्मा एमपी के सिंचाई मंत्री थे. मंत्री ने लिफ्ट इरिगेशन के लिए पंप सेट खरीदने का प्रस्ताव रखा. तब एसबी लाल सिंचाई सचिव और आरसीवीपी नरोन्हा मुख्य सचिव थे. दोनों ने प्रस्ताव का विरोध किया क्योंकि इसमें खरीदी प्रक्रिया के तय मापदंडों की अनदेखी की गई थी. तब ये मामला मुख्यमंत्री गोविंद नारायण सिंह के पास पहुंचा.
फाइल पर लिख दी घूस की बात
फाइल मुख्यमंत्री के पास पहुंची तो वे पसोपेश में पड़ गए. काफी देर तक सोचने के बाद उन्होंने फाइल पर लिखा कि वे दोनों अधिकारियों की बातों से सहमत हैं. प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी जा सकती क्योंकि खरीदी के मापदंडों का पालन नहीं करना अनैतिक है. इसके बावजूद वे प्रस्ताव को मंजूरी देते हैं क्योंकि सिंचाई मंत्री ने इसके लिए रिश्वत ली है. गोविंद नारायण सिंह ने फाइल पर ही लिख दिया कि मंत्री बृजलाल वर्मा ने प्रस्ताव को मंजूर कराने के लिए 20 हजार रुपयों की घूस चेक से ली.
मुख्य सचिव की सलाह पर प्रस्ताव नामंजूर
फाइल वापस अधिकारियों के पास पहुंची तो वे भौंचक्के रह गए. नरोन्हा ने सीएम से प्रस्ताव को मंजूरी नहीं देने की गुजारिश की. गोविंद नारायण सिंह ने उनकी बात मान ली. उन्होंने दोबारा फाइल पर लिखा कि मुख्य सचिव ने इस प्रस्ताव को अनुचित बताया है. वे उनकी बात से सहमत हैं और प्रस्ताव को नामंजूर करते हैं.
सीएम ने मंत्री को बताया मूर्ख
सीएम की दूसरी नोट से नरोन्हा की चिंता कम हुई, लेकिन आधी ही. मंत्री के भ्रष्टाचार वाला हिस्सा अब भी फाइल में मौजूद थे. वे फिर भागकर सीएम ऑफिस पहुंचे. नरोन्हा से मंत्री की रिश्वतखोरी वाली बात हटाने का आग्रह गोविंद नारायण सिंह से किया, लेकिन वे नहीं माने. मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे रिकॉर्ड में रहना चाहिए क्योंकि बृजलाल वर्मा मूर्ख हैं. उन्हें इतनी भी अक्ल नहीं है कि रिश्वत चेक से नहीं ली जाती.
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