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जानें कैसे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ 'मोदी की गारंटी' के साथ सुशासन, औद्योगिक निवेश और जन-कल्याण के जरिए एक विकसित राज्य बनने की ओर अग्रसर है.
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का करारा जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव सरकार के विरुद्ध नहीं, बल्कि प्रदेश की तीन करोड़ जनता के जनादेश का अपमान है. उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में 'मोदी की गारंटी' को धरातल पर उतारकर सरकार ने विकास की नई इबारत लिखी है.
सरकार ने किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान का भुगतान और दो वर्षों के बकाया बोनस का वितरण सुनिश्चित किया है. वहीं, 'महतारी वंदन योजना' के जरिए लगभग 70 लाख महिलाओं को 18,800 करोड़ रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई है. इसके अलावा, 10 लाख से अधिक महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया गया है.
आदिवासी समाज के उत्थान के लिए सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं. तेंदूपत्ता संग्राहकों का पारिश्रमिक बढ़ाने के साथ-साथ 'प्रधानमंत्री जनमन योजना' के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं. वहीं, पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली और नए साइबर थानों की स्थापना से नक्सलवाद के उन्मूलन और कानून-व्यवस्था को मजबूत किया गया है.
राज्य की नई औद्योगिक नीति के चलते 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जो युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलेंगे. ऊर्जा क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है. 'प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत सौर ऊर्जा के विस्तार और प्लांट लोड फैक्टर में राज्य का प्रदर्शन सराहनीय रहा है.
खनिज राजस्व के पारदर्शी उपयोग और 'खनिज ऑनलाइन 2.0' पोर्टल के माध्यम से विकास कार्यों को गति दी गई है. अवैध खनन पर सख्ती बरतते हुए राज्य सरकार ने खनिज ब्लॉकों की नीलामी में पारदर्शिता सुनिश्चित की है. साथ ही, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हजारों मोबाइल टावर और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी से ग्राम पंचायतों को जोड़ा जा रहा है.
'सेवा सेतु' और 'मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076' जैसे ई-गवर्नेंस माध्यमों से 500 से अधिक सरकारी सेवाएं ऑनलाइन की गई हैं. सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए 'श्री रामलला दर्शन योजना' शुरू की गई है, तो वहीं पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत सात करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं.
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