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चंडीगढ़ को आर्टिकल 240 के दायरे में लाने की खबर पर सियासत गरमाई, गृह मंत्रालय ने दी सफाई

चंडीगढ़ को आर्टिकल 240 के तहत लाने की खबरों पर केंद्र ने कहा कि प्रस्ताव सिर्फ विचाराधीन है, कोई अंतिम फैसला नहीं है. पंजाब के सभी प्रमुख दलों ने इसे लेकर केंद्र पर हमला बोला और विधेयक का विरोध जताया.

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चंडीगढ़ को आर्टिकल 240 के दायरे में लाने की खबर पर सियासत गरमाई, गृह मंत्रालय ने दी सफाई

अमित शाह 

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पंजाब में तेज होती राजनीतिक बहस के बीच केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि चंडीगढ़ को संविधान के आर्टिकल 240 के तहत लाने की प्रक्रिया पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. रविवार को गृह मंत्रालय (MHA) ने कहा कि यह प्रस्ताव केवल विचाराधीन है और संसद के शीतकालीन सत्र में इस संबंध में कोई विधेयक लाने की योजना नहीं है. मंत्रालय के अनुसार, चंडीगढ़ के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर चर्चा जरूर हो रही है, लेकिन इससे पंजाब और हरियाणा के साथ उसके मौजूदा संबंधों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. 

क्या है पूरा मामला 

विपक्षी दलों ने दावा किया था कि केंद्र जल्द ही ऐसा विधेयक लाने वाला है, जिसके बाद राष्ट्रपति को चंडीगढ़ के लिए सीधे कानून बनाने का अधिकार मिल जाएगा. अभी यह अधिकार अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, दादरा-नगर हवेली व दमन-दीव और विशेष परिस्थिति में पुडुचेरी को लेकर लागू होता है. इसी दायरे में चंडीगढ़ को शामिल किए जाने की बात कही जा रही थी. 

अभी किसके कंट्रोल में है चंडीगढ़

यदि भविष्य में ऐसा विधेयक आता है और पारित भी होता है तो चंडीगढ़ में एक स्वतंत्र प्रशासक नियुक्त किया जा सकेगा. फिलहाल, पंजाब के राज्यपाल ही चंडीगढ़ के प्रशासक की भूमिका निभाते हैं. 1966 में पंजाब पुनर्गठन के बाद यहां स्वतंत्र मुख्य सचिव प्रशासन देखता था, लेकिन 1984 के बाद से प्रशासनिक जिम्मेदारी राज्यपाल के पास है. 


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मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र पर आरोप लगाया

इस प्रस्ताव को लेकर पंजाब में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र पर आरोप लगाया कि यह पंजाब की राजधानी को कमजोर करने की कोशिश है. मान ने कहा कि चंडीगढ़ हमेशा से पंजाब का हिस्सा रहा है और रहेगा. कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने इसे 'अनावश्यक कदम' बताते हुए चेतावनी दी कि चंडीगढ़ को पंजाब से अलग करने की किसी भी कोशिश के गंभीर नतीजे होंगे. उन्होंने कहा कि पार्टी संसद में इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करेगी. 

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