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बजट पेश होने के बाद रविवार को इस पर राजनीतिक टिप्पणियां आनी शुरू हो गई हैं. हालिया मामला केरल का है. यहां एक केंद्रीय मंत्री ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि अगर केरल को ज्यादा फंड चाहिए तो खुद को पिछड़ा घोषित करें.
Political Controversy Over Kerala Budget: बीते दिन (1 फरवरी) बजट 2025 पेश होने के बाद अब इस पर राजनीतिक बयानबाजियां शुरू हो गई हैं. हाल ही में केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने एक ऐसा बयान दिया, जिससे सियासी रार छिड़ गई है. विपक्ष के इस आरोप के बीच कि बजट 2025 में केरल की अनदेखी की गई है, केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने कहा है कि अगर दक्षिणी राज्य को केंद्र से और अधिक धन चाहिए तो उसे घोषित करना होगा कि वह पिछड़ा हुआ है. इस टिप्पणी ने विवाद को और बढ़ा दिया है और सत्तारूढ़ वामपंथियों ने कहा है कि मंत्री का बयान केंद्र के 'केरल विरोधी' रुख को दर्शाता है.
केरल के मुख्यमंत्री ने दी थी प्रतिक्रिया
बता दें, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में बजट भाषण देने के तुरंत बाद, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि यह राज्य के लिए निराशाजनक बजट है. उन्होंने कहा कि केंद्र ने वायनाड के पुनर्निर्माण के लिए धन के उनके अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया है. बता दें, यहां जुलाई में भूस्खलन में 400 से अधिक लोगों की जान चली गई थी. बजट में केरल के विझिनजाम बंदरगाह को भी नजरअंदाज किया गया.
उन्होंने कहा, 'हमने वायनाड भूस्खलन के लिए विशेष पैकेज के अलावा 24,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज का अनुरोध किया था. विझिनजाम बंदरगाह के राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए, हमने इसके लिए भी समर्थन का अनुरोध किया था, लेकिन इनमें से किसी पर भी विचार नहीं किया गया.' उन्होंने कहा, 'केरल को शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में अपनी उपलब्धियों के लिए दंडित किया जा रहा है. कहा जाता है कि हमारे राज्य को और अधिक की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हम पहले से ही कई क्षेत्रों में आगे हैं. लेकिन कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जहां केरल पिछड़ रहा है. लेकिन हमें इन क्षेत्रों को ऊपर उठाने के लिए केंद्र सरकार से कोई सहायता नहीं मिलती है.' मुख्यमंत्री ने कहा, 'इस बजट में केरल को बुरी तरह से दरकिनार किया गया है और यह हमें अस्वीकार्य है.'
केंद्रीय मंत्री ने कही पूरी बात
केरल की आलोचना के बीच केंद्रीय मंत्री कुरियन ने कहा कि केंद्र उन राज्यों को वित्तीय पैकेज आवंटित करता है जो विकास सूचकांकों में पिछड़ गए हैं. वामपंथी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, 'आप घोषणा करते हैं कि केरल पिछड़ा हुआ है, कि उसके पास सड़कें, अच्छी शिक्षा आदि नहीं हैं. यदि आप कहते हैं कि शिक्षा, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण के मामले में केरल अन्य राज्यों से पीछे है, तो (वित्त) आयोग इसकी जांच करेगा और केंद्र सरकार को रिपोर्ट देगा. केंद्र सरकार रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लेगी. वह अपने आप निर्णय नहीं लेती.'
बयान पर मंत्रियों की तीखी प्रतिक्रिया
केरल के कोट्टायम जिले से आने वाले कुरियन नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री हैं. वे पिछले साल सितंबर से राज्यसभा सांसद हैं. कुरियन की टिप्पणी पर वामपंथी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. सीपीएम के राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने कहा कि केंद्र सरकार चाहती है कि केरल पिछड़ा रहे, .लेकिन ऐसा नहीं होगा.' उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का 'केरल विरोधी रुख' है और राज्य के उसके नेता भी इसी तरह की सोच रखते हैं.
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उन्होंने आरोप लगाया, 'भाजपा का उद्देश्य केरल को गरीब और पिछड़ा बनाना है. उन्होंने राज्य पर अपनी पकड़ मजबूत करने के कई प्रयास किए. चूंकि ऐसे सभी प्रयास विफल हो गए हैं, इसलिए वे अब योग्य आवंटन से इनकार करके केरल को पीछे धकेलने की कोशिश कर रहे हैं.' वरिष्ठ सीपीएम नेता ईपी जयराजन ने कहा कि केरल के लोगों को आगे आकर केंद्रीय मंत्री के बयान का विरोध करना चाहिए.
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