भारत
भारत की सीमाओं की रक्षा करने वाली बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स यानी BSF ने बॉर्डर की सुरक्षा के लिए ऐसे 'सिपाहियों' की तैनाती की है, जो बिना गोलियों के ही दुश्मन को हलाकान कर सकते हैं. इस तैनाती की वजह जान लेंगे तो BSF वालों के इंटेलिजेंस की तारीफ करते नहीं थकेंगो.
भारत और बांग्लादेश की सीमा पर BSF ने मधुक्खियों के छत्ते लगाए हैं. भारत लंबे समय से बांग्लादेश की तरफ से होने वाली घुसपैठ और तस्करी से जूझता रहा है. इस पर नकेल कसने के लिए बीएसएफ ने ये ये यूनीक तरीका निकाला है. मधुमक्खियों के छत्तों को दोनों देशों के बीच की फेंसिंग में लगाया गया है.
इन छत्तों को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले से लगी सीमा पर BSF की 32वीं बटालियन ने लगाया है. इसका मकसद ये है कि जैसे ही कोई फेंसिंग के बीच से या नीचे से घुसपैठ की कोशिश करेगा वैसे ही तार हिलने लगेगी. तार हिलेगी तो छत्ता भी हिलेगा और उससे छत्ते में रहने वाली मधुक्खियां बाहर आएंगी और वो घुसपैठ की कोशिश कर रहे शख्स को काटने लगेंगी. यानी घुसपैठ की कोशिश का मतलब सीधे-सीधे मधुक्खियों के हमले को न्योता देने के बराबर होगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसका असर दिखने लगा है.
इलाके में मधुमक्खियों के बने रहने के लिए ज़रूरी है कि उन्हें उनका खाना मिलता रहे. मधुक्खियों फूलों के रस का इस्तेमाल करके शहद बनाती हैं, इसलिए BSF ने सीमा के आसपास फूलदार पौधे भी लगाए हैं. BSF के जवानों को मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग भी दी जा रही है. ताकि वो बॉर्डर की सुरक्षा में काम आने वाली इन मधुमक्खियों का पूरा ख्याल रख सकें.
भारत ही नहीं, दुनिया के दूसरे देशों में भी सेनाएं तकनीक के साथ-साथ नैचुरल इंस्टिंक्ट्स पर काम कर रही हैं. ट्रेडिशनली कुत्तों का इस्तेमाल सेनाओं में होता रहा है. लेकिन अब सेनाएं इंटेलिजेंस गैदरिंग और दुश्मनों से लोहा लेने के लिए चूहों से लेकर डॉल्फिन और सी लायन तक को तैयार कर रही हैं.
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