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7 साल बाद भारत में शी जिनपिंग और मोदी होंगे आमने-सामने... LAC से लेकर कारोबार तक इन बड़े मद्दों पर होगी चर्चा

BRICS Summit 2026: चीनी राष्टपति शी जिनपिंग 7 साल भारत बाद आ रहे हैं. वह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे. इस दौरान जिनपिंग और पीएम मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हो सकती हैं, जिसमें सीमा पर विवाद सहित कई मद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.

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7 साल बाद भारत में शी जिनपिंग और मोदी होंगे आमने-सामने... LAC से लेकर कारोबार तक इन बड़े मद्दों पर होगी चर्चा

पीएम मोदी और शी जिनपिंग (इमेज क्रेडिट - AI)
 

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  • चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत आ रहे हैं 
  • शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे 
  • इससे पहले वह अक्टूबर 2019 में भारत आए थे
  • इस दौरान जिनपिंग, पीएम मोदी से भी मिलेंगे. 

BRICS Summit 2026: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे. पिछले 7 वर्षों में वह पहली बार भारत आ रहे हैं. चीन के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी औपचारिक द्विपक्षीय बैठक भी होने की संभावना है. आइए जानते हैं कि मोदी और  जिनपिंग के बीच होने वाली बैठक में किन-किन मुद्दों पर चर्चा होगी. 

ब्रिक्स सम्मेलन से पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबे समय तक चले सैन्य तनाव के बाद भारत और चीन के रिश्तों में सुधार की कोशिशों को नई गति मिलने की उम्मीद है. 

7 साल बाद मोदी- जिनपिंग होंगे आमने-सामने

भारत में 7 साल बाद पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने होंगे. जिनपिंग आखिरी बार अक्टूबर 2019 में भारत आए थे. तब उन्होंने चेन्नई के  ममल्लापुरम में पीएम मोदी के साथ दूसरे अनौपचारिक भारत-चीन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था.

सीमा विवाद से आर्थिक रिश्तों तक होगी चर्चा

भारत और चीन के बीच संभावित द्विपक्षीय वार्ता में LAC पर तनाव कम करने के साथ-साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर भी चर्चा हो सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देश एक रणनीतिक आर्थिक वार्ता शुरू करने की दिशा में काम कर रहे हैं.

दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय से भारी व्यापार घाटा, चीनी बाजार में भारतीय कंपनियों की सीमित पहुंच, भारत में चीनी निवेश, कारोबारियों के लिए वीजा प्रतिबंध और भारत में चीनी कंपनियों की गतिविधियों जैसे मुद्दे विवाद का कारण रहे हैं.

बैठक में भारत की ओर से इन मुद्दों को चीन के सामने उठाए जाने की संभावना है. वहीं चीन भी भारत में अपने कारोबार और कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर अपनी चिंताएं सामने रख सकता है.

डोभाल-वांग यी की बातचीत का भी होगा असर

मोदी और जिनपिंग के बीच बातचीत में हाल ही में बीजिंग में हुई भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता की भी समीक्षा होने की उम्मीद है. भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी ने सीमा मुद्दे पर बातचीत की थी.

इस वार्ता में सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने और जल्द ठोस परिणाम हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति बनी थी. दोनों पक्षों के बीच पूर्वी और मध्य सेक्टर में दो नई सैन्य हॉटलाइन, सैन्य कमांडर स्तर की बैठकों के लिए दो नए मीटिंग पॉइंट और सीमा-पार नदियों से जुड़े मुद्दों पर संवाद बढ़ाने जैसे कई प्रस्तावों पर चर्चा हुई थी.

अभी भी कई चुनौतियां बरकरार

रिश्तों में सुधार के बावजूद भारत और चीन के बीच कई गंभीर मतभेद अभी भी बरकरार हैं. भारतीय कारोबारियों के लिए वीजा से जुड़े मुद्दे, सीमा-पार नदियों के आंकड़ों को साझा करने में चुनौतियां और पाकिस्तान के साथ चीन के रणनीतिक संबंध भारत की प्रमुख चिंताओं में शामिल है.

इसके अलावा LAC पर दोनों देशों की सैन्य तैनाती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. अनुमान है कि सीमा के दोनों तरफ अभी भी करीब 50,000 सैनिक तैनात हैं. चीन की तरफ से भी भारत में उसके कारोबार पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई जा सकती है.

ऊर्जा और पश्चिम एशिया भी एजेंडे में

मोदी और शी की बातचीत केवल भारत-चीन संबंधों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है. ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के असर पर भी दोनों नेता चर्चा कर सकते हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य के आंशिक रूप से बंद होने से पैदा हुई भू-राजनीतिक और ऊर्जा संबंधी चुनौतियां भी चर्चा का हिस्सा बन सकती हैं. 

इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों से पैदा हुई वैश्विक व्यापार और भू-अर्थव्यवस्था की चुनौतियों पर भी भारत, चीन और रूस के बीच BRICS मंच पर विचार-विमर्श हो सकता है.

G20 में नहीं शामिल हुए थे जिनपिंग 

BRICS सम्मेलन में शी जिनपिंग की मौजूदगी को भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इससे पहले दोनों देशों के बीच तनाव के कारण शी ने नई दिल्ली में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया था.

अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और शी की मुलाकात हुई थी. इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी और नवंबर 2024 में पूर्वी लद्दाख में सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी हुई.

इसके बाद दोनों देशों ने रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं. सीधी उड़ानें फिर शुरू हुई हैं, वीजा प्रतिबंधों में कुछ ढील दी गई है और कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू हुई है. चीनी निवेश को लेकर भी भारत की नीति में कुछ नरमी देखने को मिली है.

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