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मोदी-जिनपिंग मुलाकात से पहले भारत को चीन का ‘तोहफा’, 6 साल बाद फिर शुरू होगी ये सेवा... क्या होगा फायदा?

BRICS Summit 2026: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं. दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट में शामिल होंगे. पीएम मोदी के साथ उनकी बैठक भी प्रस्तावित है. वहीं इस बैठक से पहले ही चीन ने भारत के बड़ा ऐलान किया है, जिसे दोनों देशों के बीच अच्छे रिश्ते की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है.

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मोदी-जिनपिंग मुलाकात से पहले भारत को चीन का ‘तोहफा’, 6 साल बाद फिर शुरू होगी ये सेवा... क्या होगा फायदा?

पीएम मोदी और शी जिनपिंग (फाइल फोटो)

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  • शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं 
  • जिनपिंग ब्रिक्स समिट में शामिल होंगे
  • PM मोदी के साथ बैठक भी प्रस्तावित है
  • बैठक में कई मद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है 

 
BRICS Summit 2026: भारत 18वें ब्रिक्स समिट की मेजबानी कर रहा है. 7 साल बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समिट में शामिल होने भारत पहुंच गए हैं. इसे दोनों देशों के बीच रिश्तों में आई खटास को अच्छे सुधार के तौर पर देखा जा रहा है. समिट के बाद मोदी और जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है. इस बैठक से पहले ही चीन ने भारत को बड़ा तोहफा देकर अच्छे रिश्ते की पहल कर दी है. आइए जानते हैं कि चीन ने भारत को क्या तोहफा दिया और इससे दोनों देशों को क्या फायदा होगा?  

चीन ने क्या दिया भारत को तोहफा?

चीन ने भारत के साथ अपने रिश्तों में नजदीकी बढ़ाते हुए एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. चीन की प्रमुख एयरलाइन चाइना सदर्न एयरलाइंस ने आज ऐलान किया है कि वह करीब 6 साल के अंतराल के बाद भारत के लिए अपनी नियमित यात्री उड़ान सेवा फिर से शुरू करेगी.

एयरलाइन 21 सितंबर से ग्वांगझू-नई दिल्ली रूट पर नियमित फ्लाइटें शुरू करने जा रही है. यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है.

कब और क्यों क्यों बंद हुई थी उड़ानें?

कोरोना महामारी के बाद दोनों देशों के बीच फ्लाइट सेवाएं काफी प्रभावित हुईं थीं. 2020 में कोविड-19 महामारी फैलने के बाद चाइना सदर्न ने भारत के लिए अपनी उड़ानें बंद कर दी थीं. अब दोनों देशों के बीच उड़ानें दोबारा सामान्य होने की दिशा में यह एक और बड़ा कदम माना जा रहा है.

कितनी उड़ानें होंगी शुरू, क्या होगा फायदा?

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, ग्वांगझू-दिल्ली प्लाइट सेवा शुरू होने के बाद चाइना सदर्न एयरलाइंस की दक्षिण एशिया में मौजूदगी और मजबूत होगी. एयरलाइन आठ राउंड-ट्रिप रूट पर हर सप्ताह 100 से अधिक उड़ानों का संचालन करेगी. इससे भारत और चीन के बीच यात्रियों के साथ-साथ कारोबारी और पर्यटन संबंधों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

brics 2026

भारत और चीन के बीच कई एयरलाइंस उड़ानें संचालित कर रही हैं. भारत की ओर से एयर इंडिया और इंडिगो, जबकि चीन की ओर से एयर चाइना और चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस भारत-चीन फ्लाइटें संचालित कर रही हैं. चाइना सदर्न के दोबारा जुड़ने से दोनों देशों के बीच उपलब्ध उड़ानों की संख्या में और इजाफा होगा.

कब-कब शुरू हुईं भारत-चीन उड़ानें?

भारत और चीन के बीच हवाई संपर्क पिछले कुछ समय से चरणबद्ध तरीके से बहाल हुआ है. इंडिगो ने नवंबर 2025 में चीन के लिए अपने रूट की घोषणा की थी. इसके बाद चाइना ईस्टर्न ने नवंबर 2025 में भारत में अपना परिचालन दोबारा शुरू किया था.

एयर इंडिया ने फरवरी 2026 में नई दिल्ली से चीन के लिए नियमित उड़ानें फिर शुरू कीं, जबकि एयर चाइना ने अप्रैल 2026 में बीजिंग-दिल्ली सेवा बहाल की थी. अब चाइना सदर्न की वापसी दोनों देशों के बीच एयर कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगी.

जिनपिंग और मोदी की मुलाकात कितनी खास?

चाइना सदर्न की यह घोषणा ऐसे वक्त आई है, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत दौरे पर हैं. शी नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. दोनों नेताओं की बातचीत में सीमा विवाद, व्यापार, आर्थिक संबंध, पर्यटन और दोनों देशों के बीच यात्रा को आसान बनाने के उपायों के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे पर बातचीत होने की संभावना हैं.  शी जिनपिंग के प्रतिनिधिमंडल में सीपीसी केंद्रीय समिति के जनरल ऑफिस के निदेशक काई ची और चीन के विदेश मंत्री वांग यी भी शामिल हैं.

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गलवान के बाद रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार

2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में भारी तनाव पैदा हुआ था. इसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और कारोबारी संबंधों में भी कई तरह की बाधाएं आईं. हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कुछ क्षेत्रों में रिश्तों को सामान्य करने की कोशिशें तेज हुई हैं.

अभी दोनों देशों के बीच बनी हैं ये समस्याएं

चीनी प्रोफेशनल्स के लिए बिजनेस वीजा को मंजूरी और भारतीय उद्योगों के लिए जरूरी कुछ चीनी उपकरणों की खरीद पर प्रतिबंधों में ढील को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. सीमा पर स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है.

लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्रों में दोनों देशों की भारी सैन्य तैनाती बनी हुई है. इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों के लिए चीन से उपकरण और पार्ट्स मंगाने में वीजा और अन्य दिक्कतें भी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं.

इसके अलावा पाकिस्तान के साथ भारत के हालिया सैन्य टकराव में चीन की अप्रत्यक्ष भूमिका ने भी नई दिल्ली और बीजिंग के रिश्तों को जटिल बनाया है. ऐसे में शी जिनपिंग की भारत यात्रा और दोनों नेताओं की बातचीत पर खास नजर रहेगी.

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