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मेयर और विधायक में कौन ज्यादा ताकतवर होता है? समझिए पूरा अंतर

BMC चुनावी नतीजे के बीच शहरी शासन व्यवस्था को लेकर दिलचस्प सवाल उठ रहे हैं. लोगों के मां में ये सवाल अक्सर रहता है कि, मेयर और विधायक में क्या फर्क है? आइए आज जानते हैं इन दोनों पद के बीच में क्या बड़ा अंतर है..

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मेयर और विधायक में कौन ज्यादा ताकतवर होता है? समझिए पूरा अंतर

सांकेतिक तस्वीर 

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मुंबई नगरपालिका (BMC) चुनावी नतीजे के बीच एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि मेयर कौन होता है? उसके पास क्या अधिकार होते हैं और विधायक से वह किस तरह अलग है? दरअसल, आमतौर पर लोगों में इसे लेकर भ्रम रहता है. आइए आज इस पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं. मेयर, जिसे अक्सर महापौर भी कहा जाता है. मेयर किसी नगर निगम या महापालिका का शीर्ष निर्वाचित प्रतिनिधि होता है. देश में 5 लाख से अधिक आबादी वाले बड़े शहरों में नगर निगम का गठन होता है और उसका प्रमुख मेयर होता है. बताते चलें, मेयर को उस शहर का प्रथम नागरिक माना जाता है.

दरअसल, भारत में नगर निगम व्यवस्था की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान 1688 में मद्रास (चेन्नई) से हुई थी. बाद में मुंबई और कोलकाता में भी नगर निगम बने. 1992 के 74वें संविधान संशोधन के बाद शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा मिला, जिससे मेयर की भूमिका और स्पष्ट हुई. 

मेयर के अधिकार और सीमाएं

मेयर नगर निगम की बैठकों की अध्यक्षता करता है और शहर के विकास से जुड़े एजेंडे तय करता है. सफाई, जल-सीवर, सड़क, ट्रैफिक, सौंदर्यीकरण और मूलभूत सुविधाओं की योजनाओं में उसकी अहम भूमिका होती है. शहर के प्रोटोकॉल में मेयर सबसे ऊपर होता है. हालांकि, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां नगर निगम आयुक्त के पास होती हैं, जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक IAS अधिकारी होता है. इसी कारण कई बार मेयर का पद प्रभावशाली होने के बावजूद औपचारिक माना जाता है. 

विधायक कौन होता है?

विधायक (MLA) सीधे जनता द्वारा चुना जाता है और वह राज्य विधानसभा का सदस्य होता है. विधायक का दायरा पूरे विधानसभा क्षेत्र तक होता है. उसे कानून बनाने, सरकार से सवाल पूछने, नीतियों पर बहस करने और विकास कार्यों के लिए फंड खर्च करने का अधिकार होता है. राज्य सरकार में सत्ता पक्ष का विधायक होने पर उसकी राजनीतिक ताकत और पहुंच काफी बढ़ जाती है.


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किसके पास ज्यादा शक्ति

अगर संवैधानिक और राजनीतिक शक्ति की बात करें तो विधायक, मेयर से अधिक शक्तिशाली माना जाता है क्योंकि वह राज्य स्तर पर फैसलों में शामिल होता है. वहीं मेयर की शक्ति शहर की सीमाओं तक केंद्रित रहती है. हालांकि, मुंबई जैसे बड़े महानगर में मेयर का प्रभाव कम नहीं होता, क्योंकि BMC देश की सबसे समृद्ध नगरपालिकाओं में गिनी जाती है. कुल मिलाकर, विधायक के पास ज्यादा राजनीतिक और कानूनी ताकत होती है, जबकि मेयर शहर के प्रशासन और स्थानीय विकास का चेहरा होता है. यह समझना जरूरी है कि दोनों पद अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं, लेकिन लोकतंत्र में दोनों की भूमिका बेहद अहम है.

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