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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम चुनने में क्यों हो रही देरी, अब कहां अटक गई कहानी?

BJP New President: भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में लागातर देरी हो रही है. भाजपा और आरएसएस के बीच किसी भी नाम को लेकर सहमति नहीं बनी है. आइए जानते है कि कहां अटक गया पेंच

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम चुनने में क्यों हो रही देरी, अब कहां अटक गई कहानी?

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BJP New President: भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनने की प्रक्रिया में पहले ही काफी देरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक किसी का भी नाम ऊपर नहीं लाया गया. खबरों के मुताबिक अभी तक भाजपा और आरएसएस के बीच किसी भी एक नाम पर सहमति नहीं बनी हैं. दूसरी तरफ जो भी नया चेहरा इस पद को संभालेगा उसके सामने बड़ी चुनौतियां आने वाली हैं. नए अध्यक्ष के नेतृत्व में पार्टी को आगामी चुनावों का सामना करना है, जिनमें 2025 में ही होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव पहला पड़ाव होगा. 

क्या है नियम ?
हालांकि भगवा पार्टी के सूत्रों को कहना है कि जल्द ही पार्टी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम उजागर करने वाली हैं. भाजपा के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी संभव होता है जब पार्टी के कम से कम 19 राज्यों में अध्यक्ष नियुक्त हो चुके हों. अभी तक पार्टी ने 37 में से 14 राज्यों में नए अध्यक्षों की घोषणा कर दी है. बचे हुए राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना और कर्नाटक मं जल्द ही नियुक्तियां की जाएंगी. 

क्या कहता है भाजपा का संविधान
भाजपा के संविधान में सभी स्तरों पर प्रमुखों के चुनाव के लिए एक ही फॉर्मूला तय किया गया है. आधे बूथ अध्यक्षों के चुनाव खत्म होने के बाद, मंडल प्रमुख का चुनाव होता है, आधे मंडल अध्यक्षों के चुनाव के बाद, जिला प्रमुखों के लिए रास्ता साफ हो जाता है। जब आधे जिला इकाई अध्यक्षों का चुनाव हो जाता है, तो प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जा सकती है. 37 राज्यों में भाजपा के प्रदेश अध्यक्षों के ऐलान के बाद पार्टी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की ओर बढ़ती है.

जुलाई में हो सकता है ऐलान
भजापा के सूत्रों का कहना है कि पीएम जुलाई के दूसरे सप्ताह तक विदेश यात्रा से वापस लौट आएंगे. तब फिर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान किया जा सकता हैं. नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को बिहार विधानसभा चुनाव के बाद 2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम विधानसभा चुनावों में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा. 
 

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