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Bihar Elections 2025: बिहार बिधानसभा चुनाव में महागठबंधन की तरफ से सीटों के बंटवारे को लेकर अभी तक किसी भी तरह की घोषणा नहीं की गई है. बल्कि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीटों पर पार्टी के अंदर गहमागहमी मची हुई हैं.
Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. एनडीए का दावा है कि सीट बंटवारे को लेकर उनके यहां सब कुछ क्लियर है. दूसरी तरफ चुनाव आयोग बिहार में मतदाता पुनरीक्षण कार्य कर रहा है. इस मौके पर राजनीतिक पार्टियां भी वोटरों की मदद में लगी हुई है और वोट इकठ्ठा करने की कोशिश कर रही हैं. पटना में महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर भी हलचल तेज हैं लेकिन अभी सस्पेंस बना हुआ हैं.
महागठबंधन में सीटों का बंटवारा
सूत्रों की मानें तो महागठबंधन में अभी सीटों का बंटवारा नहीं हो पाया है बल्कि एक दूसरे के बीच खींचतान मची हुई हैं. यहां पर लालू यादव का फैसली बहुत मायने रखता है, हालांकि राहुल गांधी के बिहार दौरे के बाद भी कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व कई चिन्हित सीटों को लेकर अपनी जिद पर अड़ा हुआ है. केवल कांग्रेस ही नहीं बल्कि अन्य सहयोगी दल भी अपनी सीटों की संख्या पर अडिग हैं.
तेजस्वी यादव का बयान
राजनीति के जानकारों को मानना हैं कि अब तेजस्वी यादव को बाहर माहौल बनाने के लिए मीडिया के सामने ये बताना पड़ रहा है कि अंदर सभी चर्चा सार्थक हो रही है. राजद नेता तेजस्वी यादव ने शनिवार को अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट साझा किया जिसमें इंडिया ब्लॉक की समन्वय समिति और विभिन्न उप-समितियों की बैठक के बारे में जानकारी दी गई. उन्होंने कहा कि आज इंडिया अलायंस की समन्वय समिति एवं विभिन्न उप-समितियों की बैठक में चुनाव संबंधी विभिन्न विषयों पर सार्थक एवं सकारात्मक चर्चा हुई. उन्होंने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को जान से मारने की धमकी मिलने की खबरों पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताना चाहिए कि बिहार में "जंगल राज" आ गया है.
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क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार
यहां पर जानकारों का कहना है कि तेजस्वी यादव हो या फिर महागठबंधन का और कोई नेता सीट बंटवारे को लेकर खुलकर चर्चा करना नहीं चाहता इससे साफ जाहिर होता है कि अंदर मीटिंग पे मीटिंग हो रही है लेकिन कोई भी सार्थकता नजर नहीं आ रही हैं. इसके पीछे कारण है कि सभी दलों ने अपने संभावित सीटों को चिन्हित कर लिया है और चिन्हित की हुई सीट ही सभी दल चाहते है. इस वजह से आजेडी तय नहीं कर पा रहा है कि किस वजह से सहयोगी दलों वाले कौन से सीट को अपने पाले में रखा जाए.
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