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CBI अफसर बनकर ठगों ने महिला को किया डिजिटल अरेस्ट, 54 लाख 90 हजार ठगे

भिलाई के मोहताज इलाके में चार ठगों ने खुद को CBI अधिकारी बताते हुए एक मासूम महिला को फोन और वीडियो कॉल के ज़रिए "डिजिटल अरेस्ट" में डाल दिया. इन अपराधियों ने कॉल के जरिए परिवार को डराया.

CBI अफसर बनकर ठगों ने महिला को किया डिजिटल अरेस्ट,  54 लाख 90 हजार ठगे

The woman was digitally arrested

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की एक महिला उस समय डिजिटल अरेस्ट की  शिकार हो गई, जब जालसाजों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर महिला और उसके परिवार को डरा धमकाकर 54 लाख 90 हजार रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए.  आरोपियों ने खुद को CBI अधिकारी बताकर, अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल कर धमकाया कि उसके पिता मनी लाउंड्रिंग मामले में फंसे हैं और उसके बैंक खाते से 2 करोड़ का ट्रांजैक्शन हुआ है. 

कैसे उड़े इतने पैसे? 

डर और भ्रम की स्थिति में आकर पीड़िता ने आरोपियों के बताए फर्जी बैंक खातों में बड़ा अमाउंट ट्रांसफर कर दिया. ठगों की इस प्रक्रिया में उन्होंने महिला से उसकी संपत्ति की जानकारी भी हासिल की, जिससे डर बना रहा और वह लगातार पैसों को आयात करती रहें. 

पुलिस ने फर्जी बैंक खातों को ट्रेस किया

दुर्ग पुलिस ने टेक्निकल और बैंकिंग डाटा जुटाकर आरोपियों के मोबाइल नंबर और फर्जी बैंक खातों को ट्रेस किया. पता चला कि सभी आरोपी लखनऊ के रहने वाले हैं. इसके आधार पर पुलिस ने लखनऊ जाकर चारों आरोपियों दीपक गुप्ता, राजेश विश्वकर्मा, कृष्ण कुमार और शुभम श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर लिया. 

54.90 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए

 पुलिस ने जानकारी दी कि राजेश विश्वकर्मा ने यूनियन बैंक में फर्जी खाता खुलवा कर उसमें 54.90 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए. बाकी आरोपियों ने इस रकम की कमीशन लेकर अलग-अलग खातों में आगे ट्रांसफर किया. 

पुलिस की मौजूदा कार्रवाई 

अधिकारियों ने आरोपियों से मोबाइल, आधार कार्ड और बैंक दस्तावेज जब्त कर लिए हैं. फिलहाल सभी को रिमांड पर लिया गया है और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है. पुलिस बाकी नेटवर्क एक्टिविटी की जांच भी जारी रखे हुए है. 

कैसे फैल रहा ठगी का जाल 

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ महीनों में कई डिजिटल अरेस्ट से जुड़े साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं, जैसे रायपुर में  58 लाख रुपये, या दुर्ग में कंपनियों के अधिकारियों से 49 लाख रुपये तक की ठगी. ये ठगी करने वाले अक्सर खुद को CBI, डिजीटल कोर्ट, आईपीएस या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर सीरियस केस की झूठी कहानी बनाते हैं.

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