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लालच देकर बुलाते थे घर... बांदा में दंपति की 33 मासूमों के साथ दरिंदगी की खौफनाक कहानी, फांसी की सजा   

बांदा कोर्ट ने POCSO एक्ट के तहत पति-पत्नी को मरते दम तक फंदे पर लटकाए रखने का फैसला सुनाया. इससे पहले अदालत ने 18 फरवरी को दोनों को दोषी ठहराया था.

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लालच देकर बुलाते थे घर... बांदा में दंपति की 33 मासूमों के साथ दरिंदगी की खौफनाक कहानी, फांसी की सजा   

बांदा यौन शोषण मामले में आरोपियों को फांसी की सजा (Representative picture)

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उत्तर प्रदेश की बांदा कोर्ट ने शुक्रवार को यौन शोषण के मामले में एक दंपति को मौत की सजा सुनाई. इस दंपत्ति पर 33 मासूमों के साथ यौन शोषण करने, उनका अश्लील वीडियो बनाने और पोर्नोग्राफी साइट्स पर अपलोड करने का आरोप है. इस दंपति के जुर्म की दास्तान इतनी खौफनाक है कि जानकर आपके भी होश उड़ जाएंगे. अदालत ने दोनों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

कोर्ट ने POCSO एक्ट के तहत पति-पत्नी को मरते दम तक फंदे पर लटकाए रखने का फैसला सुनाया है. इससे पहले अदालत ने 18 फरवरी को दोनों को दोषी ठहराया था. CBI ने 18 नवंबर 2020 को आरोपी रामभवन को अरेस्ट किया था. इसके बाद गवाहों को धमकाने और इस जुर्म में शामिल रहने के लिए दुर्गावती को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

क्या है पूरा मामला?

मामला चित्रकूट का है, जहां 55 वर्षीय रामभवन चित्रकूट में सिंचाई विभाग में JE के पद तैनात थे. वह अपनी पत्नी दुर्गावती साथ एसडीएम कॉलोनी में रहती थे. दोनों की कोई औलाद नहीं है. दुर्गावती गरीब बच्चों को लालच देकर अपने घर बुलाया करती थी. जहां दोनों मिलकर नाबालिगों के साथ कुकर्म करते. इस दौरान दोनों नाबालिगों का अश्लील वीडियो भी बना लेते थे. इसके बाद डार्क वेब के जरिए अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क के बेच देते थे.

CBI ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि दंपति इस तरह दरिंदगी ढाहते थे कि जो बच्चा विरोध करता, उसका मुंह दबा देते, उसे उलटा लटकाकर पीटते और जब भी नहीं मानता तो उस भूखा-प्यासा कमरे में बंद कर देते थे. कुछ बच्चों को खिलौना, पैसा और मोबाइल का लालच देकर जुबान बंद करा दी जाती थी

3 साल के मासूमों को भी नहीं बख्शा

सीबीआई के सामने जब यह मामला आया तो जांच में पता चला आरोपियों ने 33 ज्यादा मासूमों को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया था. इन बच्चों की उम्र 3 से 16 साल के बीच  थी. जांच में पता चला कि कुछ पीड़ितों के प्राइवेट पार्ट्स पर पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट के दौरान चोटें भी आई थीं. दरिंदे साल 2010 से 2020 के बीच उत्तर प्रदेश के बांदा और चित्रकूट के आम इलाके में एक्टिव रहे.

आरोपी रामभवन सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहा था. आरोपी गरीब बच्चों को ज्यादातर शिका बनाते थे. इसके लिए अलग-अलग तरीके अपनाते थे. जिसमें ऑनलाइन वीडियो-गेम खिलाने का लालच देना, पैसे, गिफ्ट देना आदि शामिल था.

CBI ने 10 फरवरी 2021 को आरोपी रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. 26 मई 2023 को दोनों के खिलाफ आरोप तय हुए. कोर्ट ने आरोपियों के कुकर्मों के आधार पर 'रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर' माना और इस इतने घिनौने काम के लिए मौत की सजा सुनाई. साथ ही 10 लाख रुपये जुर्माने का भी आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि यह रकम पीड़ितों में बराबर-बराबर बांटी जाए.

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