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Pralay ballistic missile: भारत डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) द्वारा बनाई गई प्रलय क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल का प्रोडक्शन बढ़ा सकता है. इसके लिए निजी क्षेत्र को भी मिसाइल के उत्पादन में शामिल किया जा सकता है.
Pralay missile: भारतीय सेना अपनी लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता बढ़ा रही है. दुश्मन के इलाके में अंदर तक भीषण हमला करने के लिए भारत के पास अब 'प्रलय' मिसाइल है. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) द्वारा विकसित 'प्रलय' एक कैनिस्टराइज़्ड क्वासी-बैलिस्टिक टैक्टिकल मिसाइल है जो खास तौर से पाकिस्तान को ध्यान में रखकर बनाई गई है. यह भारतीय सेना के पास मौजूद अब तक का सबसे घातक पारंपरिक स्ट्राइक हथियार है. पाकिस्तान के लिए बुरी खबर ये है कि भारत अब इस मिसाइल का उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. इसका मतलब है कि देश में 'प्रलय' मिसाइल का निर्माण बड़े पैमाने पर किया जाएगा.
रक्षा मामलों के न्यूज पोर्टल इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग के अनुसार, फिलहाल 'प्रलय' मिसाइल का निर्माण हैदराबाद स्थित सरकारी कंपनी भारत डायनामिक्स लिमिटेड कर रही है. देश में ज्यादातर मिसाइलों का निर्माण यहीं होता है. प्रलय युद्ध के मैदान में अहम लक्ष्यों पर सटीक पारंपरिक हमले करने के लिए बनाई गई है. यह पिनाका जैसे लंबी दूरी के रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम और अग्नि जैसी परमाणु हमला करने में सक्षम मिसाइलों के बीच की कड़ी है. भारतीय सेना को लंबे समय से ऐसे हथियार की जरूरत थी. भविष्य में इस मिसाइल की मांग तेजी से बढ़ने क उम्मीद है. भारतीय सेना को तो ये मिसाइस बड़ी संख्या में चाहिए ही, कई दूसके देश भी प्रलय में रुचि दिखा रहे हैं. इसलिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र की डिफेंस कंपनियों को भी इसके निर्माण इकोसिस्टम में शामिल किया जा सकता है.
भारतीय सेना और वायुसेना की तरफ से पहले ही 370 'प्रलय' मिसाइलों की खरीद का ऑर्डर दिया जा चुका है. इसमें से 250 मिसाइलें सेना को और 120 मिसाइलें वायुसेना को मिलनी हैं. आने वाले समय में प्रलय मिसाइल बड़ी संख्या में सेनाओं को मिल सकती है. भारत की सैन्य लीडरशिप के बीच टॉप लेवल पर रॉकेट फोर्स बनाने की चर्चा भी चल रही है. अगर भारत एक स्पेशल रॉकेट फोर्स का गठन करता है तो प्रलय मिसाइल उसकी मुख्य हथियार होगी.
प्रलय एक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है जिसकी रेंज 150 से 500 किमी है. आमतौर पर बैलिस्टिक मिसाइलें परमाणु हमले के लिए बनाई जाती हैं. लेकिन प्रलय को पारंपरिक हमले के लिए डिजाइन किया गया है. यह दुश्मन के कमांड सेंटर, लॉजिस्टिक्स हब, एयरबेस, रडार स्टेशन और फ्रंटलाइन के पीछे मौजूद अन्य अहम ठिकानों पर भीषण हमला करने के लिए बनाई गई है. ये मिसाइल अपनी उड़ान के अंतिम चरण में तेजी से रास्ता बदलती है इसलिए इसे रोक पाना लगभग असंभव है. अगर भारत 'रॉकेट फोर्स' बनाने के विचार पर आगे बढ़ता है तो सेना को हजारों की संख्या में प्रलय मिसाइल की जरूरत होगी.