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अयोध्या राम मंदिर दान मामले में एसआईटी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चपंत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दे दी है. साथ ही साफ किया कि दान चोरी का खेल निचले स्तर पर हुआ, जिसमें 8 आरोपियों को जेल भेज दिया गया है.
अयोध्या राम मंदिर बनने के बाद यहां हर दिन लाखों लोगों की भीड़ और करोड़ों रुपये का किये जाने वाला दान सुर्खियों में रहा, लेकिन करोड़ों श्रद्धालुओं ठेस तब पहुंची, जब राम मंदिर के दान में चोरी का खेल उजागर होने की बात सामने आई. इसमें पुलिस प्रशासन से लेकर सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए एसआईटी की जांच गठित की. इसमें 8 लोगों को गिरफ्तार कर पूछताछ और बरामदगी की गई. इसके अलावा उच्च लेवल पर जांच जारी हुई, जिसमें अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चपंत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिल गई है. एसआईटी ने पूरे चोरी के खेल की अंतिम रिपोर्ट सौंपते हुए 8 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनकी गिरफ्तारी हो चुकी है.
इस पूरे मामले की जड़ में दान मैनेजमेंट और निगरानी की खामियां थीं, जब मामला तूल पकड़ने लगा, तो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था. जांच के दौरान यह बात सामने आई कि दान में मिली नगदी के रखरखाव में शुरुआती स्तर पर घोर लापरवाही बरती गई थी, जिसका फायदा उठाकर निचले स्तर के कर्मियों ने धांधली की. SIT की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि चंपत राय ने खुद इस गड़बड़ी की जानकारी मिलते ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने पुलिस और एसआईटी की टीम के साथ आरोपियों को पकड़वाने में मदद की थी. यानी उच्च स्तर पर नीयत की नहीं, बल्कि प्रशासनिक नियंत्रण की कमी मुख्य समस्या थी.
SIT की प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने 8 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमे दर्ज किए गये हैं. इस जांच से यह साफ जाहिर होता है कि विशालकाय धार्मिक ट्रस्टों में नकदी दान प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती है, जब रोजाना लाखों रुपये का नकद चढ़ावा आता है, तो केवल "नैतिकता" के भरोसे काम नहीं चलाया जा सकता. यह मामला सिर्फ दो बड़े चेहरों के निर्दोष साबित होने का नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि अब मंदिर प्रशासन को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी अकाउंटिंग अपनानी होगी.
राम मंदिर दान चोरी के बाद से श्रद्धालुओं को खासी ठेस पहुंची. क्योंकि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से जो पैसा भगवान को भेंट किया. उस पर गलत नजर पड़ गई. हालांकि एसआईटी की रिपोर्ट से यह भी साफ हो गया है कि शीर्ष स्तर पर आपकी दी हुई निधि का दुरुपयोग नहीं हुआ है, लेकिन निचले स्तर प जरूर धांधली की गई. यही वजह है कि दानकर्ताओं को नगद दान के बजाय ट्रस्ट के QR कोड, UPI या बैंक ट्रांसफर का उपयोग करना चाहिए, जो सबसे सुरक्षित है. इसे आपको हर रुपये की रसीद तो मिलेगी ही ट्रैकिंग भी रहेगी. वहीं ट्रस्ट ने भी इस घटना के बाद दान की गिनती और ऑडिट प्रक्रिया को और कड़ा कर दिया है, जिससे दान का एक भी पैसा इधर से उधर न हो सके.